-संयुक्त संघर्ष समिति की हुंकार—एकजुटता से ही रुकेगी निजीकरण की तलवार
हनुमानगढ़। गंगानगर-हनुमानगढ़ विद्युत संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण के मुद्दे पर अब निर्णायक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। शनिवार को जंक्शन स्थित एईएन कार्यालय में आयोजित बैठक में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिनिधि मंडल ने साफ कर दिया कि 27 अप्रैल को हनुमानगढ़ की सड़कों पर अभूतपूर्व जनसैलाब उतरकर निजीकरण के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराएगा।
बैठक में संयोजक अरविन्द गढ़वाल, कुलदीप शर्मा, कुलदीप पुनिया, अनिल चलका, राकेश झाझड़ा, रमेश हुड्डा, सुनील गिरी और उमाशंकर सहित कई नेताओं ने कर्मचारियों को एकजुटता का संदेश दिया। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि पूरे विभाग के अस्तित्व की है।
संयोजक अनिल चलका ने उग्र तेवर दिखाते हुए कहा कि हनुमानगढ़ पर निजीकरण की तलवार लटक रही है और यदि अब भी कर्मचारी नहीं जागे तो आने वाला समय बेहद कठिन होगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस फैसले को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और कर्मचारियों की एकता ही इस “तलवार” को तोड़ सकती है।
उन्होंने दावा किया कि 27 अप्रैल का आंदोलन अब तक के सभी प्रदर्शनों को पीछे छोड़ देगा। “इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे कि विभाग को भी अंदाजा हो जाएगा कि कर्मचारियों की ताकत क्या होती है,” उन्होंने कहा। तकनीकी, मंत्रालयिक और फील्ड से जुड़े सभी कर्मचारियों ने आंदोलन में भाग लेने की तैयारी पूरी कर ली है।
बैठक में कुलदीप शर्मा ने भी साफ कहा कि निजीकरण केवल कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता के लिए भी नुकसानदेह साबित होगा। इससे बिजली महंगी होगी, सेवाओं की गुणवत्ता गिरेगी और आम उपभोक्ता परेशान होंगे। इसलिए इस आंदोलन को जनआंदोलन का रूप देना जरूरी है।
संघर्ष समिति ने गांव-गांव और शहर के हर हिस्से में संपर्क अभियान तेज कर दिया है। कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से जोड़ने और आंदोलन में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लगातार बैठकें और संवाद किए जा रहे हैं। समिति के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण जरूर होगा, लेकिन अपनी ताकत और संख्या के बल पर सरकार को झुकाने का माद्दा रखता है।
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