– महासंघ ने सरकार पर संवादहीनता का लगाया आरोप, 14 दिसंबर को जयपुर में होगा राज्यस्तरीय महासम्मेलन
हनुमानगढ़। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की संघर्ष चेतना यात्रा शुक्रवार को हनुमानगढ़ पहुंची, जहां कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पेंशन स्कीम-ओपीएस) सहित अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। यात्रा के आगमन पर महासंघ जिला अध्यक्ष चंद्रभान ज्याणी एवं पटवार संघ जिलाध्यक्ष अमर सिंह दहिया के नेतृत्व में पटवार विश्रांति गृह में महासंघ के पदाधिकारियों का स्वागत किया गया। इसके बाद सैकड़ों कर्मचारियों ने रैली के रूप में कलेक्ट्रेट तक विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से लंबित मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की मांग की।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष महावीर प्रसाद शर्मा और प्रदेश महामंत्री महावीर सिंह सिहाग के नेतृत्व में निकली यह यात्रा जयपुर से प्रारंभ हुई है। इसका उद्देश्य प्रदेशभर के कर्मचारियों से संवाद स्थापित कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय करना है। महासंघ ने आरोप लगाया कि सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को यथावत रखने, पदोन्नति के अवसर बढ़ाने, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण करने तथा समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने जैसी प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
प्रदेश महामंत्री महावीर सिंह सिहाग ने कहा कि राज्य कर्मचारियों के 53 हजार करोड़ रुपये पीएफआरडीए के अंतर्गत रखे गए हैं, जबकि यह राशि जीपीएफ खातों में जमा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में परिभाषित पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को यथावत रखते हुए नई पेंशन योजना (एनपीएस) को समाप्त किया जाना आवश्यक है। महासंघ की पहली मांग राज्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की है।
महासंघ की 11 सूत्रीय मांगों में प्रमुख रूप से शामिल हैं समान कार्य के लिए समान वेतन नीति लागू करना, न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये निर्धारित करना, जनवरी 2020 से जून 2021 तक के मंहगाई भत्ते का एरियर नकद भुगतान करना, ग्रामीण क्षेत्र के कार्मिकों को 10 प्रतिशत ग्रामीण भत्ता स्वीकृत करना तथा कर्मचारियों को सेवाकाल में पांच पदोन्नति के अवसर देना। इसके अलावा संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने, रिक्त पदों को नियमित नियुक्तियों से भरने, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के कार्मिकों को साप्ताहिक अवकाश देने, तथा आरजीएचएस योजना में कटौतियों को बंद कर सुविधाएं बहाल करने जैसी मांगें भी शामिल हैं।
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