श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन

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कृष्ण–सुदामा प्रसंग, हवन यज्ञ व विशाल भंडारे के साथ पूर्ण हुई सात दिवसीय कथा
हनुमानगढ़ टाउन के ऐतिहासिक भटनेर दुर्ग के समीप स्थित बरकत कॉलोनी, फाटक गौशाला परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आज श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ भव्य समापन हुआ। कथा का समापन कृष्ण–सुदामा के मार्मिक प्रसंग तथा हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
प्रख्यात कथा वाचक आचार्य श्री दयानंद जी शास्त्री व्यास पीठ ने कथा का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए कृष्ण–सुदामा की मित्रता को निष्काम प्रेम, त्याग और सच्चे संबंधों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सुदामा की सादगी और कृष्ण की करुणा आज के युग में भी मानव जीवन को सही दिशा देने वाली है। कथा के दौरान भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं की कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसमें प्रकृति, जीव-जंतुओं और जीवन के अनुभवों से सीख लेने का संदेश दिया गया। कथा के अंतिम दिवस आचार्य श्री दयानंद जी शास्त्री ने राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाई, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। समापन अवसर पर आयोजक हिसारिया परिवार की ओर से मदनचंद हिसारिया, अशोक हिसारिया, सोनू गोयल, प्रदीप गोयल एवं राहुल हिसारिया ने कथा वाचक का शाल ओढ़ाकर सम्मान किया तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात विधिवत हवन यज्ञ में पूर्णाहुति दी गई।
कथा के समापन के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध बैठकर सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे के पश्चात महिलाओं को कलश वितरण भी किया गया, जिसे लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला ।
अंत में आयोजक हिसारिया परिवार ने हनुमानगढ़ के समस्त शहरवासियों, श्रद्धालुओं, गोसेवकों तथा गौशाला प्रबंधन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से यह सात दिवसीय धार्मिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कार और सेवा की भावना को आगे बढ़ाने की बात कही।

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