कर्नाटक के प्रसिद्ध धर्मस्थल मंदिर में कथित नरसंहार और महिलाओं के साथ अत्याचार के खुलासे ने पूरे देश को हिला दिया है और इस खुलासे के केंद्र में है एक गुमनाम सफाईकर्मी, जिसने 19 साल तक मंदिर परिसर के पास 100 से ज़्यादा महिलाओं और युवतियों की लाशें जलाने और दफनाने का दावा किया है।
इस गुमनाम सफाईकर्मी यानी व्हिसलब्लोअर (वह व्यक्ति होता है जो खतरा उठाकर किसी छुपे हुए सच को सामने लाता है ) की पहचान अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है। अदालत में पेशी के वक्त भी उसे सिर से पांव तक कपड़े से ढका गया था, केवल आंखों के पास पारदर्शी पट्टी थी ताकि वह देख सके। यह सुरक्षा इसलिए दी गई क्योंकि उसने जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं, वे मंदिर प्रशासन और प्रभावशाली शक्तियों से जुड़े बताए गए हैं।
अब कर्नाटक सरकार ने धर्मस्थल मंदिर में महिलाओं और बच्चियों से रेप-हत्या के आरोप के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। जांच टीम में आईपीएस अधिकारी डॉ. पुनव मोहंती, एमएन अनुचेत, सौम्यलता और जितेंद्र कुमार दयाम शामिल हैं।
कर्नाटक सरकार ने रविवार को जारी किए आदेश में कहा है कि SIT इस केस के अलावा राज्य में इससे जुड़े अन्य मामलों की भी जांच करेगी। सिद्धरमैया सरकार ने महिला आयोग की सिफारिश पर ये फैसला लिया है। केस दर्ज होने के बाद पूरे देश में ये मामला सुर्खियों में है।
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क्या है पूरा मामला
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मस्थल मंदिर ट्रस्ट के अंतर्गत 1995 से 2014 तक काम कर चुके एक दलित सफाई कर्मचारी ने 3 जुलाई को पुलिस को शिकायत देकर दावा किया कि उसे लगभग दो दशकों तक महिलाओं और नाबालिगों के शवों को गुप्त रूप से जलाने या दफनाने के लिए मजबूर किया गया — जिनमें से अधिकांश के साथ यौन हिंसा और हत्या के स्पष्ट संकेत थे।
उसके अनुसार, शवों को आमतौर पर नेत्रावती नदी के किनारे दफनाया जाता था ताकि नम मिट्टी में जल्दी विघटन हो जाए और कोई सुराग न मिले। एक भयावह विवरण में उसने बताया कि 2010 में उसे एक स्कूली लड़की का शव दफनाने को कहा गया, जिसकी स्कर्ट और अंडरवियर गायब थी और शरीर पर रेप और गला घोंटने के निशान थे। एक अन्य मामले में एक 20 वर्षीय महिला की लाश का चेहरा तेजाब से जलाया गया था, उसे अखबार में लपेट कर जलवाया गया।
सफाईकर्मी ने कहा कि 2014 में उसकी नाबालिग रिश्तेदार के साथ भी यौन उत्पीड़न हुआ, जिसके बाद वह परिवार समेत धर्मस्थल से भाग गया और गुमनाम पहचान के साथ दूसरे राज्य में रहने लगा। उसने बताया कि आरोपी धर्मस्थल मंदिर प्रशासन से जुड़े बेहद प्रभावशाली लोग हैं, जो विरोध करने वालों को खत्म कर देते हैं। वह अब पोलीग्राफ टेस्ट या किसी भी वैज्ञानिक जांच के लिए तैयार है ताकि सच सामने आ सके।
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मैंने हड्डियां खुदाई कर निकालीं, फोटो सबूत भी दिए हैं
पूर्व सफाईकर्मी ने दावा किया है कि उसने कुछ कंकालों की खुदाई करके उनकी तस्वीरें खींचीं और उन्हें पुलिस के साथ अपने आधार कार्ड व कर्मचारी पहचान-पत्र के साथ सौंपा है। उसका कहना है कि यदि इन शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार किया जाए तो मृतकों की आत्मा को शांति और उसे अपनी ‘गिल्ट’ से मुक्ति मिलेगी।
अब वह गवाह संरक्षण कानून, 2018 के तहत सुरक्षा की मांग कर रहा है ताकि वह आगे और शवस्थल बता सके और अपराधियों की पहचान उजागर कर सके। उसका कहना है कि इनमें से कई अपराधी मंदिर ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली लोग हैं “जो विरोधियों को खत्म करने से नहीं हिचकते।”

शिकायतकर्ता ने कोर्ट पेश किए सबूत
इस मामले की वकालत कर रहे वकील ओजस्वी गौड़ा और सचिन देशपांडे ने कहा कि आरोपी का नाम अभी उजागर नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के वकील केवी धनंजय को शिकायत और सबूत सौंपे जा चुके हैं ताकि अगर शिकायतकर्ता को कुछ हो जाए तो सच्चाई छुप न सके।
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धर्मस्थल मंदिर से कैसे जुड़ा अनन्या भट 2003 केस
अनन्या भट 2003 में लापता हो गई थीं। वह एक मेडिकल छात्रा थीं, और उनकी मां सुजाता भट, जो कि CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) में स्टेनोग्राफर रह चुकी हैं, पिछले दो दशकों से बेटी की तलाश में थीं। लेकिन पुलिस ने उनके केस को गंभीरता से लेने की बजाय यह कहकर टाल दिया कि अनन्या “किसी के साथ भाग गई” है। यानी उसे “फरार प्रेमिका” बताकर मामले को बंद कर दिया गया। अब जब धर्मस्थल मंदिर परिसर के पास सैकड़ों अज्ञात शवों को दबाए जाने का आरोप एक दलित सफाईकर्मी ने लगाया, तो सुजाता को आशंका हुई कि उनकी बेटी की लाश भी उन्हीं शवों में हो सकती है।
Smt.Sujatha filed a fresh complaint with #Dharmasthala Police Station, seeking justice for her daughter #AnanyaBhat, who disappeared in 2003 during a college trip.Sujatha alleges police inaction,assault by temple staff and a forced disappearance. pic.twitter.com/rt9WKSyVc9
— Yasir Mushtaq (@path2shah) July 15, 2025
इस शक के आधार पर सुजाता भट ने 15 जुलाई 2025 को धर्मस्थल थाने में एक नई शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया था, और जब उन्होंने धर्मस्थल मंदिर के प्रशासक डॉ. डी. वीरेंद्र हेग्गड़े और उनके भाई हर्षेंद्र कुमार से मदद मांगी, तो उन्हें झिड़क कर भगा दिया गया। इस तरह अनन्या भट की गुमशुदगी अब उन कथित ‘गुमनाम लाशों’ से जोड़ी जा रही है, जिनका जिक्र सफाईकर्मी ने अदालत में हलफनामे के साथ किया है।
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क्यों मशहूर है धर्मस्थल मंदिर?
धर्मस्थल मंदिर कर्नाटक के मंगलुरु के पास, नेत्रावती नदी के किनारे बसा एक बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव के एक रूप श्री मण्जुनाथ का है। यहां एक खास बात यह है कि मंदिर की पूजा हिंदू पंडित करते हैं, लेकिन मंदिर का संचालन जैन धर्म के लोग करते हैं। यह मंदिर हिंदू और जैन धर्म के मेल का उदाहरण है। हर दिन हजारों लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में मुफ्त भोजन (अन्नदान), शिक्षा और इलाज की सुविधाएं भी दी जाती हैं।

कौन है इस मंदिर के संचालक?
कर्नाटक के धर्मस्थल मंदिर का संचालन वीरसैव जैन धर्मगुरु डॉ. डी. वीरेंद्र हेगड़े करते हैं, जो हेगड़े परिवार की पांचवीं पीढ़ी से हैं और 800 साल से यह परिवार मंदिर की देखरेख कर रहा है। डी. वीरेंद्र हेगड़े को पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मान मिल चुके हैं। वे न सिर्फ धार्मिक, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के कई कामों से जुड़े हैं। मंदिर का प्रशासन ‘श्री धर्मस्थल मंदिर ट्रस्ट’ के ज़रिए चलता है, जो एक ताक़तवर संस्था मानी जाती है। हाल ही में एक सफाईकर्मी ने आरोप लगाया है कि उसे मंदिर प्रशासन की जानकारी में 1998 से 2014 के बीच 100 से ज़्यादा महिलाओं की लाशें जलाने या दफनाने को मजबूर किया गया, जिनमें से कई के साथ यौन हिंसा हुई थी। इस गंभीर मामले के बाद ट्रस्ट और मंदिर से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, हालांकि अभी किसी पर औपचारिक आरोप नहीं लगा है।
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