– फसल खराबे का मुआवजा दिलवाने की मांग, पटवारी पर जानबूझकर खराबा नहीं दिखाने का आरोप
हनुमानगढ़। कृषि संकट से जूझ रहे किसानों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की। गुरुवार को 9 एमजेडब्ल्यू व 10 एमजेडब्ल्यू क्षेत्र के किसानों ने जिला कलेक्ट्रेट पर पहुंचकर प्रदर्शन किया और उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर फसल खराबे का उचित मुआवजा दिलवाने की मांग की। किसानों का कहना है कि लगातार दो वर्षों से उनकी फसलें खराब हो रही हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते आज तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।
ज्ञापन में किसान नेता मनीष बुरडक ने बताया कि वर्ष 2024 में 9 एमजेडब्ल्यू और 10 एमजेडब्ल्यू क्षेत्र की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई थीं, लेकिन संबंधित पटवारी ने जानबूझकर खराबा नहीं दिखाया। किसानों ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 में भी दोनों क्षेत्रों में फसलें जलभराव और अन्य कारणों से खराब हुई हैं, परंतु तहसील प्रशासन अब भी इस खराबे को रिकॉर्ड में शामिल नहीं कर रहा है।
किसान नेता रघुवीर वर्मा ने बताया कि उप तहसील कार्यालय में पहले भी जब ग्वार फसल के खराबे को लेकर किसान पहुंचे थे, तब उपखंड अधिकारी हनुमानगढ़ की उपस्थिति में यह समझौता हुआ था कि वर्ष 2024 का खराबा वर्ष 2025 के सर्वे में शामिल किया जाएगा। बावजूद इसके, तहसीलदार अब यह कहकर मामला टाल रहे हैं कि “उस समय जलभराव नहीं हुआ था,” इसलिए खराबे को नहीं जोड़ा जा सकता।
किसान जगजीत सिंह जग्गी ने इस रवैये को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि विभागीय अधिकारियों की मनमानी से गरीब किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है — एक ओर फसल की तबाही, दूसरी ओर मुआवजा न मिलना। किसानों ने मांग की है कि दोनों वर्षों का पुनः सर्वे करवाया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा तुरंत प्रदान किया जाए।
प्रदर्शन में शामिल किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। उनका कहना है कि खेतों में पानी भरने से ग्वार, मूंग, बाजरा और कपास की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
किसानों ने उपखंड अधिकारी से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि खेती उनका एकमात्र जीवन-निर्वाह का साधन है, और यदि सरकार व प्रशासन ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया तो वे मजबूरन सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे। इस मौके पर राकेश लांझ, महेंद्र बुरडक, सोहन पिलानिया, सुभाष लाझ, राधेश्याम सुथार, चंद्रभान बुरड़क, बुधराम, ओमप्रकाश, पुरखाराम सुथार, हनुमान व अन्य किसान मौजूद थे।
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