सिंधी समाज में आक्रोश, झूलेलाल जी पर टिप्पणी करने वाले नेता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

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– प्रधानमंत्री के नाम जिला कलक्टर को सौंपा गया ज्ञापन, कहा—धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना असहनीय
हनुमानगढ़। सिंधी समाज के ईष्टदेव श्री झूलेलाल जी पर छत्तीसगढ़ के नेता अमित बघेल द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणी को लेकर पूरे देशभर में सिंधी समाज में आक्रोश व्याप्त है। इसी क्रम में शुक्रवार को पूज्य सिंधी नव युवा सेवा संघ सुरेशिया के सदस्यों ने विरोध जताते हुए प्रधानमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अमित बघेल ने अपने बयान से न केवल समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, बल्कि उन्होंने ईष्टदेव श्री झूलेलाल जी का अपमान कर संपूर्ण सिंधी समाज को आहत किया है।
ज्ञापन में संघ पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी धर्म या समाज के देवी-देवता के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि बघेल का यह कृत्य समाज को भड़काने वाला और मानवता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। ऐसे व्यक्ति पर सरकार द्वारा कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न करे।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो समाज को मजबूरन व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज सदैव शांति, भाईचारे और एकता के संदेश को बढ़ावा देता आया है, परंतु अपने ईष्टदेव के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
इस अवसर पर ओमप्रकाश केशवानी, खुशी अमलानी, जिला परिषद डायरेक्टर मनीष मक्कासर,बंसी खन्ना, साहिल केशवानी, फरसराम शर्मा, महादेव नानकानी, गोरा नानकानी, मोनू नानकानी, पुनीत नानकानी, पंकज केशवानी, सुनील केशवानी,  बबलू नानकानी, सुभाष नानकानी, नवीन जिसरानी, बबलू भदरा, तुषार ओचनी, जतिन रुघवाणी, राजकुमार नानकानी, रमेश नानकानी व आमिर खान सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि देश के संविधान ने प्रत्येक नागरिक को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई व्यक्ति दूसरे धर्म या समाज के आराध्य का अपमान करे। समाज ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेते हुए दोषी नेता पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि समाज में सद्भाव और आपसी सम्मान की भावना बनी रहे।

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