-लंबित मांगों के समाधान की मांग, पक्षपातपूर्ण रवैये पर जताया रोष
हनुमानगढ़। पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन, राजस्थान जिला शाखा हनुमानगढ़ ने मंत्रालयिक संवर्ग की लंबित मांगों के समाधान को लेकर राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी करते हुए आर-पार के आंदोलन की घोषणा की है। संगठन ने मुख्यमंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, पंचायतीराज मंत्री, मुख्य सचिव एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर आरोप लगाया है कि पिछले दो वर्षों से पंचायतीराज संस्थाओं में कार्यरत करीब 18 हजार मंत्रालयिक कर्मचारियों की जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
संगठन का कहना है कि कनिष्ठ लिपिक भर्ती-2013 की जांच का हवाला देकर मंत्रालयिक कर्मचारियों की मांगों को लंबित रखा गया है, जबकि किसी भी अन्य संवर्ग के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विभाग द्वारा बार-बार एक ही भर्ती की अलग-अलग स्तर पर जांच करवाई जा रही है और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों को जानबूझकर टाला जा रहा है। संगठन ने इसे मंत्रालयिक कर्मचारियों के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया बताते हुए गहरा असंतोष व्यक्त किया है।
संगठन ने मांग की है कि ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ एवं वरिष्ठ सहायकों का जॉब चार्ट ग्राम विकास अधिकारियों के समान अधिकारों सहित जारी किया जाए। पंचायत लेखों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सिंगल ओटीपी व्यवस्था समाप्त कर वित्त विभाग के निर्देशानुसार मेकर, चेकर और अप्रूवर प्रणाली लागू की जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए उत्तराखंड राज्य की तर्ज पर व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई है।
ज्ञापन में मंत्रालयिक संवर्ग के कैडर पुनर्गठन, पदोन्नति पदों की संख्या बढ़ाने, अंतरजिला स्थानांतरण की अनुमति देने तथा न्यायालय के आदेशों के अनुरूप नोशनल लाभ प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों को समान संवर्ग के अन्य कार्मिकों के बराबर अवसर और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
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