धानका समाज की एसटी प्रमाण पत्र मांग पर आंदोलन 38वें दिन भी जारी

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-समाजजनों की एकजुटता से आंदोलन को मिल रही नई ऊर्जा
हनुमानगढ़। अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र की मांग को लेकर धानका/धाणका जनजाति संघर्ष समिति का धरना 38 वें दिन भी जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने जारी रहा। लंबा खिंचते जा रहे इस आंदोलन में प्रतिदिन जिलेभर से समाजजन जुड़कर संघर्ष को और मजबूती दे रहे हैं। आज भी विभिन्न क्षेत्रों से आए समाजजनों ने भागीदारी निभाते हुए यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
इनकी उपस्थिति ने संघर्ष समिति को नई ऊर्जा प्रदान की। समिति ने उनका आभार जताते हुए कहा कि आंदोलन की असली ताकत समाज की यही व्यापक एकजुटता है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने दोहराया कि 18 सितंबर 1976 की गजट अधिसूचना के अंग्रेज़ी संस्करण में धानका समाज को अनुसूचित जनजाति में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, किंतु हिंदी अनुवाद में “धानका” के स्थान पर “धाणका” लिखा गया। इस तकनीकी त्रुटि का हवाला देकर हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में आज तक एसटी प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल अनुवाद की गलती नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने वाली गंभीर प्रशासनिक चूक है।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि अदालतों के स्पष्ट आदेशों और पूर्व में हुई सुनवाइयों के बावजूद इस समस्या को जानबूझकर टाला जा रहा है। समिति नेताओं ने कहा कि प्रमाण पत्र न मिलने से समाज के युवा शिक्षा, छात्रवृत्ति और सरकारी नौकरियों में मिलने वाले आरक्षण जैसे अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। इससे न केवल उनकी प्रगति बाधित हो रही है बल्कि पूरे समाज का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है और हर जिले-गाँव से समाज का बढ़ता सहयोग इस संघर्ष को और व्यापक बना रहा है।

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