भारतीय किसान यूनियन ने कलेक्टर से की मुलाकात, सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग
हनुमानगढ़। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) हनुमानगढ़ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मंगलवार को जिला कलेक्टर से मुलाकात कर पंजाब में राजस्थान के किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमों के खिलाफ रोष जताया। यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस समय प्रदेश के किसान दोहरी मार झेल रहे हैं, एक ओर राजस्थान सरकार द्वारा धान की खरीद शुरू नहीं की जा रही है, वहीं दूसरी ओर पंजाब में फसल ले जाने पर किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेलों में डाला जा रहा है।
किसानों ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में बताया कि राजस्थान सरकार किसानों की धान की फसल खरीदने से इंकार कर रही है, जबकि पंजाब और हरियाणा में यही फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जा रही है। मजबूर होकर राजस्थान के किसान अपनी उपज पंजाब ले जाते हैं, लेकिन वहां उन पर अवैध तरीके से मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। किसानों का सवाल है कि जब यह कहा जाता है कि किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकता है, तो फिर पंजाब में हमारे किसानों के साथ यह व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
भाकियू जिलाध्यक्ष रेशम सिंह माणुका ने कहा कि राजस्थान सरकार किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है और किसानों को आर्थिक संकट में धकेल रही है। किसानों का आरोप है कि प्रदेश के किसी भी विधायक या सांसद ने इस गंभीर मुद्दे पर अब तक आवाज नहीं उठाई, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। बार-बार निवेदन करने के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक धान की सरकारी खरीद प्रारंभ नहीं की है, जिससे किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
इस मौके पर किसान रायसाहब चाहर मल्लड़खेड़ा, सुभाष गोदारा, बलविंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, रामकुमार गोदारा, और पीड़ित किसानों के परिवारजन मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों के खिलाफ जो धाराएं लगाई गई हैं, वे पूरी तरह अनुचित और नियमों के विरुद्ध हैं। किसानों की ट्रालियों को सड़क पर रोककर उन पर धारा 318(4) और पुरानी 420 के तहत मामले दर्ज करना लोकतंत्र का मजाक है।
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