– नगरकीर्तन में पुष्प वर्षा, लंगर व कीर्तन से गूंजा हनुमानगढ़ टाउन
हनुमानगढ़। टाउन स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का 557वां प्रकाश पर्व बड़ी श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह 10.15 बजे पांच प्यारों की अगवाई में भव्य नगर कीर्तन निकाला गया। आरंभ में गुरुद्वारा सिंह सभा के हैड ग्रंथी भाई गुरचरण सिंह जुगनू ने क्षेत्र की सुख-शांति, खुशहाली और भाईचारे की अरदास की। नगर कीर्तन गुरुद्वारा सिंह सभा से प्रारंभ होकर गुरुद्वारा सुखा सिंह महताब सिंह पहुंचा, जहां पहला पड़ाव रखा गया। यहां मुख्य सेवादार बाबा जोगा सिंह और बाबा जग्गा सिंह ने पांच प्यारों का सिरोपा देकर सम्मान किया तथा चाय, ब्रेड पकोड़े व लंगर का वितरण किया गया। इसके बाद नगर कीर्तन सीला रोड, पंजाबी मोहल्ला, पुराना पोस्ट ऑफिस, पुराना बाजार,पंचायत समिति के आगे से होता हुआ लाला जी चौक, हिसारिया मार्केट,पुरानी नगरपालिका, सुभाष चौक, जकिर हुसैन पार्क, धान मंडी व प्रेम नगर गुरुद्वारा से होते हुए टिब्बी रोड, मिस्त्री मार्केट, अंडरपास, इंदिरा कॉलोनी और नई आबादी गुरुद्वारा से होते हुए ओवरब्रिज मार्ग से पुनः गुरुद्वारा सिंह सभा पहुंचा। रास्तेभर संगत ने पुष्प वर्षा कर नगर कीर्तन का स्वागत किया। जगह-जगह जलेबी, चाय, कॉफी, खीर व ब्रेड पकोड़े के भंडारे लगाकर श्रद्धालुओं ने सेवा की। कार्यक्रम में श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसायटी, भाई गुरचरण सिंह, भाई मलकित सिंह (हजूरी रागी जत्था), कथा वाचक भाई गुरमीत सिंह (जैतसर वाले) और कवि-श्री जत्था भाई दिलबाग सिंह (वलटोहा वाले) ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए संगत को निहाल किया। गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान नछत्र सिंह ने बताया कि कल टाउन व जंक्शन स्थित सभी गुरुद्वारों में अखंड पाठों के भोग डाले जाएंगे तथा खुले दीवान सजेंगे, जिनमें बाहर से आए कथावाचक, टाड़ी जत्था और हजूरी जत्थे गुरु की महिमा का गुणगान करेंगे। अंत में गुरु का अटूट लंगर बरतेगा। कार्यक्रम में गुरुद्वारा के मुख सेवादार जगजीत सिंह टोनी, प्रधान नछत्र सिंह,उपप्रधान बूटा सिंह, सचिव कर्मजीत सिंह, कोषाध्यक्ष इंद्र सिंह मक्कासर, प्रेम सिंह कमरानी, बलकरण सिंह गिल, राजेंद्र सिंह फौजी, सुलखन सिंह, नरेश कोचर, भगत सिंह, प्यारा सिंह, हरमेल सिंह, अमरजीत कौर, गुरमीत कौर भोली, इंद्रजीत कौर, मनजीत कौर, तेजेंद्र कौर, प्रीतपाल कौर, रिया सहित श्री सुखमनी साहिब सेवा सोसायटी और संगत ने तन-मन-धन से सेवा निभाई। नगर कीर्तन में श्रद्धा और सेवा का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने गुरु नानक देव जी के उपदेश “नाम जपो, किरत करो, वंड छको” की भावना को साकार किया।
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