Jaguar Fighter Jet: राजस्थान के चूरू में जगुआर फाइटर जेट क्रैश, 4 महीने में तीसरा हादसा

जगुआर (SEPECAT Jaguar) एक ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट है, जिसे मूल रूप से ब्रिटेन और फ्रांस की कंपनियों ने मिलकर डिजाइन किया था।

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आज दोपहर राजस्थान के चूरू (jaguar fighter jet) जिले के रतनगढ़ कस्बे के पास एक इंडियन एयर फोर्स (IAF) का जगुआर फाइटर जेट क्रैश हो गया। घटना की सूचना मिलते ही राजलदेसर थाने से पुलिस टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह विमान भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) का जगुआर था। इस हादसे में विमान के पायलट और को-पायलट शहीद हो गए हैं।

दोपहर करीब 12 बजकर 40 मिनट पर गांव के ऊपर से गुजरते समय प्लेन ने अपना नियंत्रण खो दिया। चश्मदीद प्रेम सिंह के मुताबिक, विमान नीचे गिरते ही छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट गया और आसपास के खेतों में आग लग गई। मलबा चारों ओर बिखरा हुआ देखा जा सकता है।

सेना के सूत्रों के मुताबिक यह जगुआर फाइटर जेट श्रीगंगानगर के पास सूरतगढ़ एयरबेस से उड़ा था। यह जेट टू सीटर था, ट्रेनिंग के लिए इसका उपयोग किया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक उन्होंने पहले विमान की गड़गड़ाहट सुनी, फिर जोरदार धमाके की आवाज आई। इसके बाद प्रशासन को घटना की जानकारी दी गई। घटना के ठोस कारणों का पता फिलहाल नहीं चला है।

ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद शवों के टुकड़े इधर-उधर पड़े दिखाई दिए। क्रैश वाली जगह से 2 शव बरामद हुए हैं। हालांकि विमान में कितने पायलट थे, इसकी अभी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं।
हादसे के बाद खेत में मिला शव
4 महीने में तीसरा जगुआर जेट क्रैश
भारतीय वायुसेना पिछले 4 महीने में तीन जगुआर फाइटर प्लैन खो चुकी है। 7 मार्च 2025 को हरियाणा के पंचकुला में वायुसेना का एक जगुआर ट्रेनिंग मिशन के दौरान क्रैश हो गया। पायलट ने समय रहते इजेक्शन कर लिया और हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई। वहीं, 2 अप्रैल 2025 को गुजरात के जामनगर में रात के अभ्यास मिशन में उड़ान भरते समय जगुआर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में एक पायलट की मौत हो गई जबकि दूसरा घायल हो गया।
क्रैश के बाद मलबे में मिला जगुआर नाम

क्या है जगुआर फाइटर जेट?
जगुआर (SEPECAT Jaguar) एक ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट है, जिसे मूल रूप से ब्रिटेन और फ्रांस की कंपनियों ने मिलकर डिजाइन किया था। भारत ने 1979 में इसे अपनी वायुसेना में शामिल किया था। यह विमान कम ऊंचाई पर तेज़ उड़ान, गहराई में जाकर बमबारी, और रणनीतिक हमलों के लिए बेहद सक्षम माना जाता रहा है।

विशेषता जानकारी
विकास फ्रांस-ब्रिटेन की SEPECAT कंपनी ने बनाया
भारत में सेवा प्रारंभ 1979 से इंडियन एयरफोर्स में
भूमिका ग्राउंड अटैक, डीप स्ट्राइक, सर्जिकल हमले
स्पीड लगभग 1,350 किमी/घंटा (Mach 1.3)
रेंज (दूरी) 850–1,500 किमी (मिशन पर निर्भर)
हथियार प्रणाली बम, रॉकेट, लेजर गाइडेड मिसाइल, गन
उड़ान ऊंचाई अधिकतम 14,000 मीटर तक
इंजन ट्विन Rolls-Royce Adour टर्बोजेट
नाइट ऑपरेशन लेज़र पॉड और नाइट विजन के साथ सक्षम


भारत में कब से हो रहे हैं इस्तेमाल

  • IAF में जगुआर अभी भी सेवा में हैं, लेकिन यह करीब 45 साल पुराना प्लेटफॉर्म है।
  • तकनीकी खामी, पार्ट्स की कमी और मेंटेनेंस में कठिनाई के कारण अब यह तेज़ी से रिटायरमेंट की ओर बढ़ रहा है। इनकी जगह राफेल और तेजस जैसे फाइटर जेट ले रहे हैं।
  • भारत ने लगभग 160 से ज़्यादा जगुआर विमान खरीदे और बनाए, जिनमें कई हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा भारत में ही बने।
  • यह विमान करगिल युद्ध और अन्य कई ऑपरेशनों में इस्तेमाल हो चुका है।
  • भारत ने इन विमानों को समय-समय पर अवियोनिक्स, रडार और हथियार सिस्टम से अपग्रेड भी किया है।

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