– निवर्तमान सभापति सुमित रणवां के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने किया डिस्कॉम कार्यालय का घेराव, जताया आक्रोश
हनुमानगढ़। जिले में विद्युत व्यवस्था चरमराई हुई है और डिस्कॉम की कार्यप्रणाली को लेकर आमजन में भारी रोष व्याप्त है। न तो विभाग समय पर फॉल्ट ठीक कर पा रहा है और न ही अधिकारी जनसुनवाई को तैयार हैं। शहरवासियों की शिकायत है कि फोन करने पर डिस्कॉम अधिकारी कॉल उठाते तक नहीं हैं। शिकायतों के बावजूद कई-कई दिनों तक बिजली फॉल्ट ठीक नहीं होते, जिससे नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
गत रात्रि भी विद्युत विभाग की लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण सामने आया, जब एक हिस्से में बिजली आपूर्ति रात भर बंद रही। कॉल करने पर कोई जिम्मेदार अधिकारी उपलब्ध नहीं था और तकनीकी टीम भी मौके पर नहीं पहुंची। जब निवर्तमान नगरपरिषद सभापति सुमित रणवां ने मामले को गंभीरता से उठाया और उच्चाधिकारियों से शिकायत की, तब जाकर करीब चार घंटे बाद विद्युत आपूर्ति सुचारू हो सकी।
इस पूरे घटनाक्रम से नाराज होकर मंगलवार को सुमित रणवां के नेतृत्व में शहरवासियों और जनप्रतिनिधियों ने डिस्कॉम एससी कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और करीब दो घंटे तक अधिकारियों से बातचीत चली। सुमित रणवां ने विभागीय ढर्रे पर सवाल खड़े करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। रणवां ने बताया कि एफआरटी टीम की हालत यह है कि जहां पांच कर्मचारियों की आवश्यकता होती है, वहां केवल तीन ही कर्मचारी तैनात रहते हैं। स्टाफ की कमी के कारण शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं हो पाता और पूरा शहर बार-बार अंधेरे में डूब जाता है। उन्होंने कहा कि आम नागरिक विभाग की लापरवाही से त्रस्त हैं, लेकिन अधिकारी संवेदनशीलता दिखाने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार कागजों में ड्यूटी पर दर्शाए गए कर्मचारी मौके पर होते ही नहीं हैं, जिससे जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाता है। वहीं, फॉल्ट आने के बाद 2-3 दिन तक समाधान नहीं हो पाता, जिससे गर्मी, अंधकार और जल संकट की त्रासदी झेलनी पड़ती है।
गत रात्रि विभाग की लापरवाही के कारण फील्ड रिस्पांस टीम (एफआरटी) के एक कर्मचारी को गंभीर रूप से घायल होना पड़ा जब ड्यूटी पर तैनात एक डिस्कॉम कर्मचारी ने शराब के नशे में बिजली सप्लाई चालू कर दी। उस समय एफआरटी कर्मी फॉल्ट सुधारने के लिए कार्य कर रहा था, जिससे उसे तेज़ करंट लग गया और वह घायल हो गया। सुमित रणवां ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन महिला कर्मचारी की ड्यूटी मौके पर दर्शाई गई थी, वह दरअसल पिछले 6 माह से सीकर में बैठी थी, और जिसकी जगह कार्य कर रहे कर्मचारी ने नशे में बिजली चालू कर दी, जिससे यह हादसा हुआ। रणवां ने कहा कि उनके पास सभी साक्ष्य मौजूद हैं, और वे इस मामले की शिकायत प्रदेश के उर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री तक लेकर जाएंगे। जनप्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि डिस्कॉम की कार्यप्रणाली लंबे समय से आमजन को परेशान कर रही है। न तो अधिकारी जनता की सुनवाई करते हैं, और न ही उनके फोन उठाते हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद एफआरटी की टीम दो से तीन दिन तक फॉल्ट नहीं निकाल पाती है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है।
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