Cough Syrup Death: जानलेवा बना ये खांसी सिरप! अबतक 11 की मौत, जारी हुई एडवाइजरी, पढ़ें?

मध्य प्रदेश और राजस्थान से 11 बच्चों की मौत को कफ सिरप से जोड़कर खबरें सामने आ रही है। इन दावाओं के नाम हैं Coldrif और Nextro-DS।  मीडिया रिपोर्ट्स में इन सिरप की क्वालिटी पर सवाल उठाए गए हैं। 

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को देशभर के माता-पिता और डॉक्टरों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की है। इसमें साफ कहा गया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी-जुकाम की कफ सिरप (cough syrup Death ) नहीं दी जानी चाहिए। मंत्रालय का यह बयान उस वक्त आया है जब मध्य प्रदेश और राजस्थान से 11 बच्चों की मौत को कफ सिरप से जोड़कर खबरें सामने आ रही है। इन दावाओं के नाम हैं Coldrif और Nextro-DS।  मीडिया रिपोर्ट्स में इन सिरप की क्वालिटी पर सवाल उठाए गए हैं।

क्या है मामला?
छिंदवाड़ा में पिछले कुछ दिनों में अचानक से कई बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं। 4 सितंबर से 26 सितंबर के बीच यहां 6 बच्चों की मौत हुई थी. सभी मामलों में बच्चों की किडनी फेल होने की बात सामने आई है। मामले की समीक्षा के लिए बुलाई गई कलेक्टर की मीटिंग में डॉक्टरों ने जानकारी दी थी कि कुछ परिजन बच्चों का इलाज झोला छाप डॉक्टरों से करा रहे हैं, जहां गलत दवाओं के उपयोग से स्थिति बिगड़ रही है। इस पर कलेक्टर ने ऐसे झोला छाप डॉक्टरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। साथ ही उन्होंने Coldrif एवं Nextro-DS सिरप का उपयोग पूरी तरह से बंद करने का भी आदेश दिया था।

राजस्थान में बैन हुई कायसन्स फार्मा की सभी दवाएं
छिंदवाड़ा जैसे ही मामले राजस्थान से भी आए हैं। वहां राज्य सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए मुफ्त दवा योजना के तहत कायसन्स फार्मा की सभी दवाओं के वितरण पर रोक लगा दी है और राजस्थान में जेनेरिक कफ सिरप की आपूर्ति करने वाली कायसन्स फार्मा की गहन जांच के आदेश दिए हैं। बीते, सोमवार को सीकर में एक पांच साल के बच्चे की मौत हो गई। पांच साल का नीतीश कफ सिरप लेने के बाद सो गया, रात में उठा और हिचकी आई, पानी पिया और फिर सो गया लेकिन उसके बाद फिर कभी नहीं उठा।

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने हालांकि स्पष्ट किया है कि इन दोनों राज्यों से लिए गए दवाओं के नमूनों की जांच में ऐसे कोई भी जहरीले केमिकल नहीं मिले हैं जो किडनी को नुकसान पहुंचाते हों। इसके बावजूद मंत्रालय ने डॉक्टरों और पैरेंट्स को चेतावनी दी है कि पांच साल तक की उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने से बचना चाहिए और अगर बड़े बच्चों को यह दवा दी जाए तो उनकी खुराक बेहद सावधानी के साथ तय होनी चाहिए। मंत्रालय ने सलाह दी है कि ऐसी दवा बच्चों को कम समय के लिए दी जाए और इसके इस्तेमाल के दौरान उनकी सख्त निगरानी की जाए।

एडवाइजरी के मुताबिक सभी अस्पतालों, क्लीनिकों और स्वास्थ्य केंद्रों को केवल भरोसेमंद और फार्मा-ग्रेड कंपनियों की दवाएं ही खरीदने का निर्देश दिया गया है। यह गाइडलाइन सरकारी मेडिकल स्टोरों से लेकर प्राइमरी हेल्थ सेंटर, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर और जिला अस्पतालों तक लागू होगी।

कफ सिरप में मिलें जहरीले केमिकल?
बच्चों की मौत को लेकर उठे सवालों पर मंत्रालय ने जांच रिपोर्ट भी साझा की है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने कफ सिरप, खून और अन्य नमूनों की जांच की थी।

मध्य प्रदेश की राज्य खाद्य एवं औषधि विभाग ने भी तीन नमूनों का परीक्षण किया, जिसमें डाइएथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल जैसे हानिकारक तत्व मौजूद नहीं पाए गए। वहीं पुणे स्थित NIV की जांच में एक मामले में बच्चों की मौत का कारण लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण सामने आया है।

छिंदवाड़ा में मिलें कफ सिरप में दावा किया है कि केमिकल एथिलीन ग्लाइकॉल और डाइएथिलीन ग्लाइकॉल मिला हुआ था। यह जहरीला केमिकल है, जिसे गाड़ियों के कूलेंट और एंटी फ्रीज प्रोसेस में इस्तेमाल किया जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसकी थोड़ी-सी मात्रा भी किडनी और दिमाग को बुरी तरह नुकसान पहुंचा देती है।

बड़ी बात ये भी है कि मामले में जिन दो कफ सिरप- कोल्ड्रिफ (Coldrif) और नेक्सा डीएस (Nexa DS) को प्रशासन ने बैन किया है, उन्हें प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों ने भी अपने पर्चे में लिखा है। हालांंकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि सैंपलों की जांच में किसी में भी एथिलीन ग्लाइकॉल और डाइएथिलीन ग्लाइकॉल नहीं पाया गया।

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