भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन

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-हरिद्वार के आचार्य भानु देव शास्त्री ने सुनाई श्रीमद्भागवत कथा, श्रद्धालुओं ने लिया जीवन में धर्म अपनाने का संकल्प
हनुमानगढ़। 
उत्तराखंड विकास समिति हनुमानगढ़ द्वारा जंक्शन स्थित श्री बद्रीनाथ धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तहत कथा का पांचवां दिवस श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। कथा की शुरूवात मुख्य यजमान कृष्ण बन्ना ने सपरिवार विधिवत पूजा अर्चना कर करवाई। हरिद्वार से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य भानु देव शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं, पूतना वध, तृणावर्त संहार, माखन चोरी, गोवर्धन पर्वत धारण और ब्रज की गोपियों के प्रति श्रीकृष्ण के प्रेमपूर्ण व्यवहार का विस्तृत वर्णन किया।
कथावाचक आचार्य शास्त्री ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन के गूढ़ रहस्यों का प्रतीक हैं। पूतना वध असत्य और पाखंड के नाश का संदेश देता है, वहीं गोवर्धन पर्वत धारण करने की कथा हमें प्रकृति की रक्षा और सामूहिकता का पाठ पढ़ाती है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का सम्पूर्ण जीवन धर्म, नीति और प्रेम का साक्षात उदाहरण है, जिसे हर व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
कथा के दौरान पूरे पंडाल में भक्ति रस की धारा बहती रही। आचार्य अशोक सेमल्टी संगीता चार्य ऋषिकेश उत्तराखंड, आचार्य बबलू नौटियाल संगीता चर्या ऋषिकेश उत्तराखंड द्वारा प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। कथा स्थल पर पुष्प सजावट, दीपों की रोशनी और सुंदर झांकियों से दिव्यता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

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