टैक्स बार एसोसिएशन हनुमानगढ़ की पहल, आयकर अधिनियम 2025 पर एक दिवसीय सेमिनार, विशेषज्ञों ने बताए व्यावहारिक पहलू

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हनुमानगढ़. कर प्रणाली में पारदर्शिता, सरलता और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे आयकर अधिनियम, 2025 पर टैक्स बार एसोसिएशन, हनुमानगढ़ की ओर से आयकर विभाग के सहयोग से एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। हनुमानगढ़ स्थित होटल वीरासा में हुए सेमीनार में कर अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और व्यापारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सेमिनार का उद्देश्य नए आयकर कानून के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाना और करदाताओं के बीच जागरूकता बढ़ाना रहा।
सेमीनार में जिलेभर से टैक्स प्रोफेशनल्स और व्यापारी उपस्थित रहे। सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट पंकज सरावगी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने आयकर अधिनियम, 2025 के नवीन प्रावधानों, संरचनात्मक बदलावों और व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अतिरिक्त आयुक्त ललित बिश्नोई बोले-नया कानून समय की मांग
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आयकर विभाग के अतिरिक्त आयुक्त ललित बिश्नोई ने कहा कि आयकर अधिनियम, 1961 समय के साथ अत्यधिक संशोधनों के कारण जटिल हो गया था। अब नए आयकर अधिनियम, 2025 का लागू होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नए कानून से कर विवादों में कमी आएगी और करदाता तथा विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। आयकर विभाग आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापारियों और टैक्स प्रोफेशनल्स को नए कानून की जानकारी दे रहा है।
पुराने कानून की जटिलता हुई कम: अमित गोयल
आयकर अधिकारी अमित गोयल ने कहा कि नए आयकर अधिनियम से करदाताओं का भरोसा बढ़ेगा। पुराने कानून में बार-बार संशोधनों के कारण जटिलता बढ़ गई थी, जबकि नए कानून में धाराओं की संख्या कम है और उपखंडों को समाप्त कर दिया गया है। इससे कानून को समझना और लागू करना दोनों आसान हो गया है। इस अवसर पर आयकर अधिकारी मोती लाल वर्मा एवं सन्नी छाबड़ा भी मंचासीन रहे।
पंकज सरावगी ने समझाए नए आयकर अधिनियम के अहम बदलाव
मुख्य वक्ता पंकज सरावगी ने पुराने आयकर अधिनियम, 1961 में हुए संशोधनों की पृष्ठभूमि बताते हुए नए आयकर अधिनियम, 2025 के प्रावधानों को सरल उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने बताया कि नए कानून में धारा पढ़ना और समझना आसान है क्योंकि उपखंडों की जटिलता समाप्त कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अब वित्तीय वर्ष और कर निर्धारण वर्ष की जगह एक ही नाम टैक्स वर्ष कर दिया गया है, जिससे करदाताओं को भ्रम नहीं होगा। सरावगी ने नए आयकर फॉर्म, कैपिटल गेन, मैट एवं एमटी कर की गणना, तथा टीडीएस में किए गए बदलावों पर विस्तार से चर्चा की।
आयकर विभाग की प्रस्तुति और तकनीकी जानकारी

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