Rupee vs Dollar: क्या सच में 1 डॉलर 150 रुपये हो सकता है? वायरल भविष्यवाणी ने बढ़ाई चिंता, जानिए पूरा मामला

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भारत में इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर बाजार तक एक सवाल तेजी से चर्चा में है क्या भारतीय रुपया इतना कमजोर हो सकता है कि 1 डॉलर की कीमत 150 रुपये तक पहुंच जाए? यह बहस तब शुरू हुई जब फाइनेंस कमेंटेटर और Biz News+ के फाउंडर जयंंत मुंधड़ा ने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि अगर वैश्विक ऊर्जा संकट और गहराया, तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं और विदेशी निवेशकों ने उभरते बाजारों से पैसा निकालना जारी रखा, तो भारतीय रुपया गंभीर दबाव में आ सकता है।

उनकी यह बात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। किसी ने इसे डर फैलाने वाला बयान कहा तो किसी ने इसे आने वाले आर्थिक संकट की चेतावनी माना। लेकिन सवाल अब भी वही है क्या सच में ऐसा हो सकता है? चलिए विस्तार से समझते हैं।

आखिर क्यों दबाव में है भारतीय रुपया? पिछले कुछ महीनों में दुनिया के आर्थिक हालात तेजी से बदले हैं।

  • पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव
  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
  • अमेरिकी डॉलर की मजबूती
  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
  • विदेशी निवेशकों का सतर्क रुख

इन सभी वजहों का सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब भी तेल महंगा होता है, भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होने लगता है।

जयंंत मुंधड़ा की क्या कहा गया?
मुंधड़ा का कहना है कि भारत अभी भी कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स में विदेशी निर्भरता से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाया है।ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और विदेशी निवेश पर निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। अगर लंबे समय तक तेल महंगा रहा और वैश्विक निवेशक डॉलर की तरफ भागते रहे, तो रुपये में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। यही वजह है कि उनका “1 डॉलर = 150 रुपये” वाला बयान तेजी से वायरल हो गया।

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क्या RBI अब रुपये को बचाने की रणनीति बदल रहा है?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब हर स्तर पर रुपये को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि सिर्फ बहुत ज्यादा अस्थिरता रोकने पर फोकस कर रहा है। यानी RBI धीरे-धीरे होने वाली गिरावट को स्वीकार कर सकता है, लेकिन अचानक भारी गिरावट को रोकना चाहता है। हाल ही में RBI ने बाजार में डॉलर बेचकर रुपये को 97 प्रति डॉलर के पार जाने से रोकने की कोशिश भी की थी।

क्या 100 रुपये प्रति डॉलर भी संभव है?
पूर्व IMF डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर और हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ पहले ही कह चुकी हैं कि अगर रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंचता है तो इसे अपने आप आर्थिक संकट नहीं माना जाना चाहिए। उनका कहना था कि सिर्फ एक्सचेंज रेट किसी देश की आर्थिक ताकत तय नहीं करता। लेकिन 150 रुपये प्रति डॉलर की बात बाजार के लिए कहीं ज्यादा गंभीर मानी जा रही है।

क्या वाकई 150 तक पहुंच सकता है रुपया?
Choice Broking की कमोडिटी एनालिस्ट कावेरी मोरे के मुताबिक, यह स्थिति पूरी तरह असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए बेहद गंभीर वैश्विक संकट की जरूरत होगी।

उनके अनुसार ऐसी स्थिति तभी बन सकती है जब:

  • कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक रिकॉर्ड स्तर पर रहें
  • विदेशी निवेशक तेजी से पैसा निकालें
  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लगातार बढ़े
  • कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं संकट में फंस जाएं
  • भारत का करंट अकाउंट घाटा तेजी से बढ़े

यानि फिलहाल बाजार 150 रुपये प्रति डॉलर जैसी स्थिति को बेस केस नहीं मान रहा।

भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा तेल क्यों?
भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी तेल आयात पर निर्भरता है।

जब तेल महंगा होता है तो:

  • आयात बिल बढ़ जाता है
  • सरकार और कंपनियों को ज्यादा डॉलर चाहिए होते हैं
  • चालू खाता घाटा बढ़ता है
  • रुपये पर दबाव बढ़ता है

इसके अलावा कमजोर रुपया सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालता है।

क्या-क्या महंगा हो सकता है?

  • पेट्रोल और डीजल
  • हवाई यात्रा
  • मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स
  • ट्रांसपोर्ट
  • खाने-पीने का सामान
  • इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स

यानी डॉलर की मजबूती सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि घर के बजट तक पहुंच जाती है।

RBI के पास क्या हैं बचाव के हथियार? रुपये को संभालने के लिए RBI कई तरीके अपनाता है:

  • विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचना
  • फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप
  • करेंसी स्वैप ऑपरेशन
  • लिक्विडिटी मैनेजमेंट
  • सट्टेबाजी पर नियंत्रण

हालांकि, लगातार डॉलर बेचने का नुकसान भी होता है क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा भंडार घट सकता है और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक अक्सर “कंट्रोल्ड डिप्रिसिएशन” यानी नियंत्रित गिरावट को प्राथमिकता देते हैं।

क्या भारत के पास अभी भी मजबूत सुरक्षा कवच है? विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की स्थिति फिलहाल इतनी कमजोर नहीं है कि रुपया अचानक ढह जाए।

भारत के पास अभी भी:

  • मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार
  • स्थिर बैंकिंग सिस्टम
  • बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था
  • सक्रिय केंद्रीय बैंक

जैसे कई सुरक्षा कवच मौजूद हैं। इसी वजह से अधिकतर अर्थशास्त्री 150 रुपये प्रति डॉलर को फिलहाल “एक्सट्रीम रिस्क” मानते हैं, न कि निकट भविष्य की वास्तविक संभावना।

फिर सोशल मीडिया पर इतना डर क्यों?
असल वजह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में हर वैश्विक संकट का असर आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखा है। कभी पेट्रोल महंगा हुआ, कभी खाने-पीने का सामान, कभी फ्लाइट टिकट और कभी रोजमर्रा का खर्च। यही कारण है कि अब लोग ऐसे आंकड़ों को पूरी तरह मजाक या अफवाह मानकर नजरअंदाज नहीं कर रहे। शायद यही वजह है कि “1 डॉलर = 150 रुपये” वाली बहस इंटरनेट पर इतनी तेजी से ट्रेंड कर रही है।

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