साहिब बंदगी आश्रम मक्कासर में दिव्य आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन

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– सद्गुरु मधु परमहंस जी के सान्निध्य में हुआ लाइव सत्संग, सुमिरन शौक से करो या भय से का दिया संदेश
हनुमानगढ़। मक्कासर के 2 केएनजे स्थित साहिब बंदगी आश्रम में शनिवार को एक दिव्य एवं भावपूर्ण आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। यह सत्संग सद्गुरु मधु परमहंस साहिब जी के सान्निध्य में लाइव प्रसारण के माध्यम से रांजड़ी आश्रम (जम्मू) से प्रसारित हुआ। इस आयोजन में हरियाणा व राजस्थान के दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगत शामिल हुई और सत्संग का लाभ प्राप्त किया।
सद्गुरु मधु परमहंस साहिब जी ने अपने आध्यात्मिक प्रवचनों से श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और सच्चे भक्ति पथ पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने फरमाया कि ष्अगर इंसान को यह सदैव याद रहे कि एक दिन इस नश्वर संसार को छोड़कर जाना है, तो उसका आधा जीवन झंझटों से मुक्त हो सकता है।ष् उन्होंने बताया कि यह काल का देश है, यहाँ मृत्यु हमेशा सिर के ऊपर मंडरा रही है और किसी भी क्षण जीवन समाप्त हो सकता है।
सद्गुरु जी ने चेताया कि इस संसार में कोई भी सदा सुखी नहीं है। शरीर क्षणभंगुर है, समय के साथ इसमें अनेक विकार आ जाते हैं। पहले कमर में असर होता है, फिर पैरों में कमजोरी आती है, दृष्टि क्षीण हो जाती है और इसी तरह धीरे-धीरे मृत्यु समीप आती है। लेकिन मनुष्य इन सच्चाइयों से बेखबर होकर समय गंवा देता है।
उन्होंने कहा कि “भजन और सुमिरन का कार्य बुढ़ापे के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए। जो यह सोचते हैं कि वृद्धावस्था में भक्ति करेंगे, वे भूल कर रहे हैं। तब शरीर और मन साथ नहीं देंगे।” सद्गुरु ने यह भी कहा कि “कलयुग में रोग अधिक होंगे कृ कफ, वात और फ्ति जैसी बीमारियाँ आम होंगी। इसलिए सुमिरन आज और अभी से शुरू करना चाहिए।”

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