10 पॉइंट्स में जानें Noida इंटरनेशनल एयरपोर्ट में क्या कुछ होगा खास?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को यूपी के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport Jewar) का उद्घाटन करेंगे। हालांकि, पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है।फेज-1 की लागत 11,282 करोड़ रुपये है। वहीं, पूरे एयरपोर्ट की लागत 29,560 करोड़ रुपये है। इस एयरपोर्ट का मकसद जेवर को उत्तरी भारत के लिए बड़ा एविएशन हब बनाना है।

सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी कार्गो टर्मिनल का उद्घाटन भी करेंगे। मोदी थोड़ी देर में एयरपोर्ट पहुंचने वाले हैं। दोपहर 12 बजे एयरपोर्ट के फेज-1 का उद्घाटन करेंगे। जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

24 साल का इंतजार आज खत्म
24 साल के इंतजार के बाद आज जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र में नई ट्रांसपोर्ट क्रांति की शुरूआत हो जाएगी। साल 2001 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की ओर से जेवर में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल और एविएशन हब (टीआईएएच) का प्रस्ताव पेश किया था।

 

10 पॉइंट्स में जानें जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में क्या कुछ होगा खास?

1. एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुल 52 स्क्वायर किमी में बनना प्रस्तावित है। सभी 4 फेज का काम पूरा हो जाने के बाद ये एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा। अभी चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इसका एरिया 47 स्क्वायर किमी है। फर्स्ट फेज में 3300 एकड़ में टर्मिनल और रनवे बनाया गया है। एक रनवे के साथ इस टर्मिनल की सालाना क्षमता 3 करोड़ पैसेंजर संभालने की होगी। इसकी लागत करीब 11 हजार करोड़ है।

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2. 100% ‘डिजी यात्रा’ सुविधाः यह भारत का पहला ऐसा एयरपोर्ट होगा जहां एंट्री से लेकर बोर्डिंग तक पूरी तरह से पेपरलेस एक्सपीरियंस मिलेगा। यात्रियों को अपना बोर्डिंग पास या आईडी दिखाने की जरूरत नहीं होगी। उनका चेहरा ही उनका टिकट होगा। सुरक्षा जांच और बोर्डिंग गेट्स पर ऑटोमैटिक बायोमेट्रिक सिस्टम लगा होगा, जिससे लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा।

3. सबसे कम टर्निंग टाइमः नोएडा एयरपोर्ट का रनवे और टैक्सी-वे इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि विमान लैंडिंग के बाद बहुत कम समय में दोबारा उड़ान के लिए तैयार हो सकेंगे। इससे एयरलाइंस का ईंधन और यात्रियों का समय बचेगा।

4. इन-डोर ग्रीन फॉरेस्टः टर्मिनल के अंदर एक बड़ा आर्टिफिशियल फॉरेस्ट और वॉटरफॉल बनाया गया है। यह सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट की तरह ही बनाया गया है।

5. ग्राउंड ट्रांसपोर्टेशन सेंटरः टर्मिनल के ठीक सामने एक मल्टी-मॉडल सेंटर बनाया गया है जहां मेट्रो, हाई-स्पीड रेल (RRTS), बसें और टैक्सी एक ही जगह उपलब्ध होंगी। यात्री को लंबी दूरी पैदल नहीं चलनी पड़ेगी।

6. इन-डोर नेविगेशन ऐपः यात्रियों की सुविधा के लिए एक खास ‘वे-फाइंडिंग’ तकनीक शुरू की गई है। एयरपोर्ट का मोबाइल ऐप आपको अपनी करंट लोकेशन से गेट नंबर, लाउंज या ड्यूटी-फ्री शॉप तक का सटीक रास्ता (गूगल मैप्स की तरह) दिखाएगा।

7. स्मार्ट पार्किंग और EV चार्जिंगः यात्री घर से निकलने से पहले ही ऐप के जरिए अपना पार्किंग स्लॉट बुक कर सकेंगे। पार्किंग शुल्क का भुगतान सीधे फास्ट टैग से होगा, जिससे गेट पर रुकना नहीं पड़ेगा।

8. नेट-जीरो और ग्रीन ऑपरेशंसः एयरपोर्ट का डिजिटल ट्विन सॉफ्टवेयर रियल-टाइम में बिजली और पानी की खपत की मॉनिटरिंग करेगा, जिससे ऊर्जा की बर्बादी को रोका जा सके। यहां बड़े-बड़े सोलर पैनल लगाए गए हैं। यह देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट है जो अपनी जरूरत की पूरी बिजली खुद पैदा करेगा।

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9. कॉन्टैक्टलेस सेल्फ सर्विसः एयरपोर्ट पर ज्यादा से ज्यादा सेल्फ सर्विस पर फोकस किया गया है। यात्री खुद अपना सामान टैग करके मशीन में डाल सकेंगे, जिससे काउंटर पर खड़े होने की जरूरत नहीं होगी। एयरपोर्ट पर कई जगह ‘डिजिटल कियोस्क’ होंगे जहां AI-पावर्ड असिस्टेंट यात्रियों के सवालों के जवाब देंगे।

10. स्मार्ट बैगेज ट्रैकिंगः यात्री अपने स्मार्टफोन ऐप के जरिए यह देख सकेंगे कि उनका बैग इस समय कहां है? जैसे- उनका बैगेज चेक-इन काउंटर पर है या विमान में लोड हो रहा है या बेल्ट पर आ रहा है। इससे सामान खोने या देरी होने की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

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