केरल की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया को यमन (Nimisha Priya Yemen) में एक यमनी नागरिक की हत्या के मामले में 2018 में दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी। यमन की सर्वोच्च अदालत और राष्ट्रपति की ओर से यह फैसला अब अंतिम हो चुका है।
यमन के हूथी नियंत्रण वाले हिस्से में 16 जुलाई 2025 को फांसी की तारीख तय की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स ने विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया कि भारत सरकार इस मामले पर नजर रखे हुए है और लोकल अधिकारियों और निमिषा के परिवार के साथ लगातार संपर्क में है।
निमिषा 2017 से जेल में बंद हैं, उन पर यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की ड्रग का ओवरडोज देकर हत्या करने का आरोप है। निमिषा और महदी यमन में एक प्राइवेट क्लिनिक में पार्टनर थे। आरोप है कि महदी ने निमिषा का पासपोर्ट कब्जे में ले रखा था और उसे प्रताड़ित करता था।
क्या है पूरा मामला
निमिषा प्रिया वर्ष 2011 में नर्सिंग कार्य के लिए यमन गई थीं। 2015 में उन्होंने Al Aman Medical Clinic नाम से एक निजी क्लिनिक शुरू किया जिसमें उन्होंने यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी को बिजनेस पार्टनर बनाया।
बाद में विवाद बढ़ने लगे।
निमिषा ने आरोप लगाया कि महदी ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया, उन्हें बंधक बनाकर शारीरिक और मानसिक शोषण किया। 2017 में पासपोर्ट वापस पाने और यमन से निकलने के लिए उन्होंने उसे नींद की दवा देकर बेहोश करने की कोशिश की, जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को टुकड़ों में काटकर छिपाने की कोशिश की गई, जो बाद में सामने आ गया।

क्या है निमिषा को बचाने का रास्ता
शरिया कानून के मुताबिक, पीड़ित पक्ष को अपराधियों की सजा तय करने का हक है। हत्या के मामले में मौत की सजा है, लेकिन पीड़ित का परिवार पैसे लेकर दोषी को माफ कर सकता है। इसे ‘दीया’ या ‘ब्लड मनी’ कहा जाता है, जिसका जिक्र कुरान में भी किया गया है।
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निमिषा को माफी दिलाने के लिए उनकी मां ने अपनी संपत्ति बेचकर और क्राउडफंडिंग के जरिए ‘ब्लड मनी जुटाने की भी कोशिश की। 2020 में निमिषा को सजा से बचाने और ब्लड मनी इकट्ठा करने के लिए ‘सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल’ बनाया गया। केरल के एक जाने-माने बिजनेसमैन ने निमिषा को बचाने के लिए 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था।

विदेश मंत्रालय का कहना है कि निमिषा को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है, लेकिन मेहदी के परिवार ने अभी तक ब्लड मनी स्वीकार नहीं की है। निमिषा की मां यमन की राजधानी सना में डटी हुई हैं और बेटी को बचाने की कोशिश कर रही हैं।
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