भागवत कथा में गूंजा कान्हा की बाल लीलाओं का रस

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-नामकरण संस्कार, पूतना वध और माखन चोरी प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर
हनुमानगढ़। 
ऐतिहासिक भटनेर दुर्ग के समीप स्थित बरकत कॉलोनी की फाटक गौशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, नामकरण संस्कार, पूतना वध एवं अन्य दिव्य प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिमय वर्णन किया गया। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण “राधे-कृष्ण” तथा “नंदलाला की जय” के जयघोषों से भक्तिमय हो उठा।
व्यास पीठ से कथा वाचन करते हुए आचार्य श्री दयानंद जी शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण केवल एक अवतार नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और धर्म की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण संस्कार का वर्णन करते हुए बताया कि महर्षि गर्गाचार्य ने गोकुल पहुंचकर बालक का नाम “कृष्ण” रखा और भविष्यवाणी की कि यह बालक समस्त संसार का उद्धार करेगा। कथा के दौरान जैसे ही बालक कृष्ण की मोहक झांकियां प्रस्तुत की गईं, श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति में झूम उठे।
आचार्य श्री ने पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राक्षसी पूतना विष पिलाकर बालक कृष्ण की हत्या करने आई थी, लेकिन भगवान ने उसका उद्धार कर उसे मातृत्व का स्थान प्रदान किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान शरण में आने वाले प्रत्येक जीव का कल्याण करते हैं। कथा में तृणावर्त वध, शकटासुर उद्धार, माखन चोरी और गोपियों के साथ बाल लीलाओं का भी सुंदर वर्णन किया गया। बाल गोपाल की मनमोहक झांकियों और मधुर भजनों ने कथा स्थल को वृंदावनमय बना दिया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों पर नृत्य कर आनंद लिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और फूलों की वर्षा कर कान्हा का स्वागत किया। गौ सेवा संस्थान फाटक गौशाला के अध्यक्ष मुरलीधर गर्ग ने बताया कि कथा का आयोजन हिसारिया परिवार द्वारा श्रद्धा भाव से करवाया जा रहा है। आयोजक अशोक हिसारिया ने बताया कि आगामी दिनों में गोवर्धन लीला, महारास एवं सुदामा चरित्र जैसे महत्वपूर्ण प्रसंग सुनाए जाएंगे।

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