चारों लैबर कोड के खिलाफ, न्यूनतम वेतन ओर सामाजिक सुरक्षा को लेकर संघर्षो को तीखा करेंगे- शेर सिंह शाक्य

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हनुमानगढ़। आज व्यापार मंडल धर्मशाला हनुमानगढ़ जंक्शन में जगदंबा एवं प्राइवेट गोदाम पल्लेदार मजदूर यूनियन सीटू का दूसरा सम्मेलन संपन्न हुआ । सम्मेलन की शुरुआत झंडा रोहण से की गई और मजदूर हकों व जनता के जनवादी आंदोलनों में संघर्ष करते हुए शहीद हुए तमाम साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई उसके उपरांत सम्मेलन की शुरुआत हुई सम्मेलन की अध्यक्षता सत्यनारायण दादा, सहीराम और मिसा राम के तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मजदूरों के वरिष्ठ नेता रामेश्वर वर्मा ने बताया कि आज जिस दौर में आपका सम्मेलन हो रहा है यह देश की आजादी के बाद का सबसे कठीन समय है भाजपा सरकार ने मजदूरों द्वारा हासिल किए गए तमाम श्रम कानूनों को ध्वस्त कर चार लैबर कोडो में तब्दील कर दिया है और श्रमिकों की तमाम सामाजिक सुरक्षा बुढ़ापा पेंशन ईएसआई ईपीएफ दुर्घटना बीमा क्लेम एक्सीडेंटल मृत्यु आदि पर मिलने वाली तमाम सुविधाओं को खत्म कर दिया है दूसरी तरफ सरकार की नीतियों से आम आदमी  बेहाल है ।उसके बाद बिरादरना संगठनों से कॉमरेड सुल्तान खान कामरेड बहादुर सिंह चौहान कॉमरेड बसंत सिंह कामरेड रिछपाल सिंह राठौड़ कामरेड ओमप्रकाश ओ पी कामरेड  संदीप बसोड ने बधाई संदेश दिया और यह आश्वासन दिया कि आपके संघर्षों में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देंगे रिपोर्ट पर 22 साथियों ने बहस में हिस्सा लिया और अपने सुझाव दिए।

बहस में आए हुए सुझावों पर चर्चा करते हुए सीटू जिला महासचिव कामरेड शेर सिंह शाक्य ने बताया कि हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि जो सामान पुरी दुनिया में मजदूर तैयार करता है वो सिर्फ सबसे पहले पूंजीपतियों को इस्तेमाल करने के लिए मिलता है हम चाहते हैं कि पहले निर्माण करने वाला मजदूर इस्तेमाल करे जो कपड़ा मजदूर तैयार करता है लेकिन पहनने के लिए उसको नहीं मिलता जो ऐसी मजदूर तैयार करता है लेकिन मजदूर को बैठने के लिए ऐसी नहीं मिलता और वह इस व्यवस्था में संभव ही नहीं है इसलिए हमारा नारा है एकता संघर्ष और समाजवाद हमारा मुख्य लक्ष्य है व्यवस्था परिवर्तन हम हमारे संघर्षों के रास्ते से व्यवस्था परिवर्तन करना चाहते हैं न्याय की व्यवस्था में बदलाव शाक्य ने मोदी सरकार की नीतियों की घोर आलोचना की  जब से देश में भाजपा की सरकार आई है तब से किसान और मजदूर विरोधी तमाम नीतियों को लागू किया जा रहा है तमाम सार्वजनिक उपक्रमों को पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है बेरोजगारी बढ रही है नोकरियां समाप्त हो गई है।

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