ओडिशा दिवस, जिसे उत्कल दिवस (Utkal Divas 2026) के नाम से भी जाना जाता है, राज्य के इतिहास और पहचान से जुड़ा एक बेहद खास दिन है। यह दिन उस ऐतिहासिक पल की याद दिलाता है जब लंबे संघर्ष के बाद ओडिशा को एक अलग प्रांत के रूप में मान्यता मिली। यह सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि ओडिशा की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और एकता का प्रतीक भी है। साल 2026 में भी ओडिशा दिवस 1 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। इस दिन पूरे राज्य में विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए इस ऐतिहासिक मौके को याद किया जाता है।
ओडिशा दिवस का इतिहास
ओडिशा दिवस हर साल 1 अप्रैल को मनाया जाता है। इसी दिन साल 1936 में ब्रिटिश शासन के दौरान बिहार और उड़ीसा प्रांत से अलग करके ओडिशा को एक स्वतंत्र प्रांत बनाया गया था। यह उपलब्धि ओडिया भाषा और संस्कृति की पहचान के लिए लंबे समय तक चले आंदोलन का परिणाम थी। इस आंदोलन में मधुसूदन दास की अहम भूमिका रही, जिन्हें ओडिशा के निर्माण का प्रमुख चेहरा माना जाता है।
ओडिशा दिवस का महत्व
ओडिशा दिवस का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व काफी बड़ा है। इस दिन लोग अपनी भाषा, परंपराओं और विरासत पर गर्व महसूस करते हैं। राज्यभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, परेड और कई तरह के आयोजन किए जाते हैं। यह दिन ओडिया समाज की एकता और उनके संघर्ष को भी याद दिलाता है।
मधुसूदन दास कौन थे?
Madhusudan Das ओडिशा के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में से एक थे। उन्हें प्यार से “उत्कल गौरव” कहा जाता है, जिसका मतलब है “ओडिशा का गौरव”। वह एक स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, वकील और राजनीतिक नेता थे, जिन्होंने ओडिशा को एक अलग राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाई। उस समय ओडिया भाषा और संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया।

मधुसूदन दास ओडिशा के पहले ग्रेजुएट और पहले वकील भी थे। उन्होंने अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के विकास और लोगों के अधिकारों के लिए किया। वे महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और उद्योगों के विकास के भी बड़े समर्थक थे। उनके प्रयासों की वजह से ही 1936 में ओडिशा एक अलग प्रांत के रूप में अस्तित्व में आया। इसलिए आज भी उन्हें राज्य के निर्माण का मुख्य सूत्रधार माना जाता है।
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