देश में मोदी सरकार के 12 साल के शासन में यह पहला मौका था, जब सरकार सदन में महिला आरक्षण ( Women Reservation Bill )बिल पास नहीं करा पाई। अब महिला आरक्षण नई जनगणना के नतीजे आने से पहले लागू नहीं होगा, यानी 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका फायदा नहीं मिलेगा। दरअसल, सरकार लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए संविधान का 131वां संशोधन बिल लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था।
लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया।
24 साल बाद कोई सरकारी बिल गिरा
बिल पर 528 सांसदों ने वोट किया। इसका दो तिहाई 352 होता है, लेकिन बिल के समर्थन में 298 वोट ही मिले। NDA के पास 293 सांसद हैं। भाजपा सिर्फ 5 अन्य सांसदों को कन्वेंस कर पाई। बाकी विपक्ष को विश्वास में लेने में सफल नहीं हुई, इसलिए बिल पास नहीं करा पाई।
- 2002 के आतंकवाद निवारण बिल (पोटा) के बाद संसद में पराजित होने वाला पहला सरकारी विधेयक है।
- 1990 के संविधान (64वां संशोधन) बिल के बाद लोकसभा में गिरने वाला पहला संविधान संशोधन विधेयक है।
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पहले जानिए बिल क्या है?
पहला बिल: संविधान संशोधन के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसमें 815 सीटें राज्यों से सीधे चुने गए प्रतिनिधियों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। साथ ही राज्यों की विधानसभा सीटों में भी जनसंख्या के आधार पर बदलाव का प्रस्ताव है।
दूसरा बिल: यह यूनियन टेरिटरी एक्ट, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम और GNCT दिल्ली एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव रखता है, जिससे परिसीमन और विधानसभा सीटों में बदलाव संभव हो सके।
तीसरा बिल: नए परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) के गठन के लिए एक नया कानून लाने का प्रस्ताव है, जो सीटों के पुनर्निर्धारण का काम करेगा।
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महिला आरक्षण और परिसीमन का क्या है आपस में कनेक्शन?
सरकार ने लोकसभा में तीन बिल पेश किए थे। इसमें संविधान (131वां) संशोधन बिल, परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 शामिल थे। महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी। हालांकि यह अब 2034 तक लागू होगा।
इसके लिए परिसीमन की जरूरत है। परिसीमन का मतलब है कि देश की आबादी के आधार पर लोकसभा और विधानसभा की सीटों की सीमाएं और संख्या तय करना। यह काम एक परिसीमन आयोग करता है। पहले तय होगा कि किस राज्य में कितनी सीटें होंगी। किन इलाकों की सीमाएं क्या होंगी। उसके बाद ही आरक्षण तय हो पाएगा।
अब महिला आरक्षण का क्या होगा
2023 में बना और 16 अप्रैल 2026 को नोटिफाई किया गया महिला आरक्षण कानून लागू रहेगा। लेकिन महिलाओं को इसका फायदा 2034 के लोकसभा चुनाव से मिलेगा। इसके लिए 2027 में पूरी होने वाली जनगणना के मुताबिक परिसीमन जरूरी होगा।

अब सरकार के सामने कौन-कौनसे ऑप्शन?
सरकार बिल में कुछ बदलाव कर सकती है। जैसे- दक्षिणी राज्यों की सीटें बढ़ाने का प्रावधान। परिसीमन के लिए 2011 की बजाय 2027 की जनगणना का आधार बनाएगी। नए सिरे से बिल पेश कर सकती है, जिस पर विपक्ष के सुझाव लेकर सहमति बना सकती है।
किन राज्यों में कितनी सीटें बढ़ने का अनुमान?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।
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