Bihar Bandh: बिहार में वोटर वेरिफिकेशन पर सियासी बवाल: सड़कों पर उतरे राहुल-तेजस्वी

निर्वाचन आयोग ने जून के आखिरी सप्ताह में यह आदेश जारी किया था, और जुलाई के पहले सप्ताह से जिलों में कार्य शुरू हो चुका है। लेकिन इसके तुरंत बाद ही विपक्ष ने 8 जुलाई को राज्यव्यापी बिहार बंद का आह्वान किया।

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बिहार (Bihar Bandh) में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनः सत्यापन (Voter Re-verification) को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। चुनाव आयोग के इस कदम को विपक्षी दलों ने साजिश करार देते हुए 9 जुलाई को प्रदेशव्यापी बंद का ऐलान किया है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया विशेष समुदायों और दलों के मतदाताओं को सूची से हटाने की कोशिश है।

पार्टी कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी सेतु, रामाशीष चौक, हाजीपुर मुजफ्फरपुर एनएच 22 समेत जिले के कई स्थानों पर टायर जलाए और आगजनी की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे भी लगाए।

राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और पप्पू यादव इनकम टैक्स चौराहा पहुंचे। यहां से राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और दीपांकर भट्टाचार्य एक गाड़ी पर सवार होकर प्रदर्शन करते चुनाव आयोग के ऑफिस के लिए निकले। बेगूसराय में RJD कार्यकर्ताओं ने NH-31 को जाम कर दिया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जहानाबाद में भी महागठबंधन नेताओं ने मेमू पैसेंजर को रोका और नारेबाजी की। थोड़ी देर बाद पुलिस ने सभी को ट्रैक से हटाया। दरभंगा में प्रदर्शनकारियों ने नमो भारत ट्रेन को रोका।

पटना के मनेर में NH-30 को जाम किया गया। नेताओं ने आगजनी कर प्रदर्शन किया। माले के नेतृत्व में आरा–सासाराम मुख्य मार्ग को जाम किया गया। इससे सैकड़ों गाड़ियां जाम में फंस गईं। पप्पू यादव पटना के सचिवालय हॉल्ट और अपने समर्थकों के साथ ट्रेन रोककर विरोध प्रदर्शन किया है।

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क्या है मामला?
बिहार में राज्य निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी जिलों में मतदाता सूची का दोबारा सत्यापन कराया जाए। यह कवायद “डुप्लिकेट वोटर्स हटाने और मृत/स्थानांतरित वोटर्स की पहचान” के लिए की जा रही है। इस कार्य के लिए 15 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया है।

क्या है विपक्ष का आरोप
राज्य निर्वाचन आयोग के इस आदेश के खिलाफ विपक्षी दलों ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों ने इस कदम को चुनावी मतदाता सूची से “वोटर सर्जरी” बताकर इसका पुरजोर विरोध किया है। उनका आरोप है कि यह सत्यापन विशेष समुदायों और वर्गों को निशाना बनाकर किया जा रहा है, जिससे उनका वोट अधिकार प्रभावित हो सकता है।

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क्या है वेरिफिकेशन का तरीका
जिला प्रशासन के अनुसार, मतदाता सूची का सत्यापन ब्लॉक, पंचायत और वार्ड स्तर पर बीएलओ (Booth Level Officer) द्वारा किया जा रहा है। इसमें घर-घर जाकर फॉर्म 6, 7 और 8 के जरिए लोगों से जानकारी ली जा रही है:

  • फॉर्म 6: नए मतदाताओं के लिए
  • फॉर्म 7: मृत या स्थानांतरित वोटरों के हटाने के लिए
  • फॉर्म 8: करेक्शन या एड्रेस बदलाव के लिए

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मुख्य विवाद क्या है

  • विपक्ष को आपत्ति है कि यह प्रक्रिया सिर्फ विपक्ष के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में तेजी से की जा रही है।
  • बिना नोटिस के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, ऐसा आरोप भी सामने आया है।
  • कुछ जगहों पर यह भी देखा गया कि बीएलओ को राजनीतिक आधार पर नियुक्त किया गया है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

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कब से शुरू हुआ यह मामला
निर्वाचन आयोग ने जून के आखिरी सप्ताह में यह आदेश जारी किया था, और जुलाई के पहले सप्ताह से जिलों में कार्य शुरू हो चुका है। लेकिन इसके तुरंत बाद ही विपक्ष ने 8 जुलाई को राज्यव्यापी बिहार बंद का आह्वान किया। कई जिलों में इसका असर भी देखा गया।

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सरकार और आयोग का पक्ष
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमबद्ध और पारदर्शी है। सरकार का कहना है कि इससे “फेक वोटर्स” हटाए जाएंगे और चुनाव निष्पक्ष होंगे। साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि कोई भी मतदाता अगर नाम हटने को लेकर आपत्ति करता है, तो वह फॉर्म 6 या 8 के जरिए उसे दोबारा जोड़ सकता है।

क्या असर हो सकता है

  • अगर यह वेरिफिकेशन निष्पक्ष नहीं हुआ, तो चुनाव से पहले मतदाता ध्रुवीकरण का मुद्दा बन सकता है।
  • अल्पसंख्यक, दलित और प्रवासी वोटर्स के नाम बड़ी संख्या में हटे, तो राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है।
  • विपक्ष इसे जनविरोधी कदम बताकर जनता के बीच मुद्दा बना सकता है, जिससे चुनावी नैरेटिव बदल सकता है।

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