आम आदमी पार्टी (AAP) में बड़ी राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। पार्टी के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने शुक्रवार शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि AAP के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता उनके साथ हैं।
राघव ने बताया कि पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने यह फैसला लिया। इसलिए दलबदल कानून लगने का कोई मतलब नहीं है। राघव चड्ढा ने कहा पिछले कुछ सालों से, मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं। हमने यह फैसला किया है कि हम संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को BJP में मिला लेंगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Sandeep Pathak और Ashok Kumar Mittal भी मौजूद रहे। अशोक मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले, 15 अप्रैल को जालंधर स्थित उनके आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की थी। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में इस तरह के घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
राघव चड्ढा ने AAP पर क्या लगाए आरोप?
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने के फैसले पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई हैं। उन्होंने कहा, ”जिस AAP को मैंने 15 सालों तक अपने खून से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए। वह पूरी तरीके से सिद्धांतों से, अपने मूल्यों से भटक गई है। अब ये पार्टी यह देशहित के लिए नहीं बल्कि अपने पर्सनल फायदे के लिए काम कर रही है।”
#WATCH | 2/3rd MPs of AAP in Rajya Sabha announce merging with the BJP.
AAP MP Raghav Chadha says, “There are 10 AAP MPs in the Rajya Sabha, more than 2/3rd of them are with us in this. They have signed and this morning we submitted the signed letter and documents to the Rajya… pic.twitter.com/mn4kuYs2ht
— ANI (@ANI) April 24, 2026
एंटी डिफेक्शन लॉ क्या है?
भारत के एंटी डिफेक्शन लॉ (संविधान की दसवीं अनुसूची) के तहत अगर किसी पार्टी में टूट (split) को मान्यता चाहिए और अयोग्यता से बचना है, तो राज्यसभा में पार्टी के कम-से-कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य साथ होने चाहिए
- AAP के राज्यसभा में कुल सदस्य = 10
- कम-से-कम 7 सांसद साथ आएं, तभी दल-बदल कानून के तहत टूट वैध मानी जाएगी
- 7/10 सांसदों का समर्थन राघव चड्ढा के लिए जरूरी होगा, तभी दल-बदल कानून से बचते हुए BJP में जाना संभव होगा
- यानी 70% AAP राज्यसभा सांसदों को साथ लाना पड़ेगा
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