श्रावण मास का अंतिम शुक्रवार यानी आज 8 अगस्त को पूरे दक्षिण भारत में वरलक्ष्मी व्रतम (Varalakshmi Vratam) के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। तड़के से ही घर-घर में महिलाएं सज-धजकर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना में जुटी हैं। मंदिरों में भक्ति गीतों की गूंज और घरों में कलश स्थापना के साथ त्योहार का शुभारंभ हुआ।
यह पर्व विशेष रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में लोकप्रिय है। वरलक्ष्मी देवी लक्ष्मी का वह रूप, जो भक्तों को ‘वरदान’ प्रदान करती हैं। आराधना के जरिए परिवार की खुशहाली, धन, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है।
वरलक्ष्मी व्रत 8 अगस्त को खास बात यह है कि इस दिन इंद्र योग और सुकर्मा योग जैसे विशेष संयोग बन रहे हैं। जो पूजा को और भी प्रभावशाली बना देते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत करने वाली स्त्री के जीवन में अष्टलक्ष्मी का वास होता है यानी केवल धन ही नहीं, बल्कि संतान, विजय, धैर्य, विद्या और ऐश्वर्य भी उसके जीवन में आता है। यही कारण है कि इस पर्व को सिर्फ व्रत नहीं, कल्याण का उत्सवकहा गया है।
वरलक्ष्मी व्रत (Varalakshmi Vratam) का पौराणिक महत्व
वरलक्ष्मी व्रत की कथा देवी पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है। एक बार माता पार्वती ने शिवजी से पूछा कि कौन-सा व्रत महिलाओं के लिए सबसे कल्याणकारी है, तब शिवजी ने वरलक्ष्मी व्रत की महिमा बताई। मान्यता है कि जो स्त्री इस व्रत को नियमपूर्वक करती है, उसके जीवन में अष्टलक्ष्मी, धन, धान्य, संतान, विद्या, धैर्य, विजय, वीरता और गज लक्ष्मी का वास होता है।
वरलक्ष्मी व्रत (Varalakshmi Vratam) की पूजा विधि
स्नान और संकल्प– सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें, फिर व्रत का संकल्प लें।
कलश स्थापना– लकड़ी के पाटे पर लाल या पीले कपड़े को बिछाएं. उस पर थोड़ा सा चावल रखें और उस पर एक कलश स्थापित करें.। कलश में जल, सुपारी, हल्दी, एक सिक्का और अक्षत डालें. ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें।
मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापना– कलश के पास मां लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. उन्हें फूल, चावल, कुमकुम, हल्दी आदि अर्पित करें।
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आरती और कथा– मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें और फिर वरलक्ष्मी व्रत कथा पढ़ें या सुनें. कथा में माता चारुमती की कहानी आती है, जिनके व्रत से पूरी नगरी समृद्ध हो गई थी।
भोग अर्पण– मां लक्ष्मी को खीर, फल, पायसम, नारियल, मिठाई, और दक्षिण भारतीय व्यंजन अर्पित करें।
सौभाग्य सामग्री का आदान-प्रदान– व्रतधारी महिलाएं एक-दूसरे को सुहाग की चीज़ें (चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी आदि) भेंट करती हैं और आशीर्वाद लेती हैं।
प्रसाद वितरण और व्रत समापन– अंत में प्रसाद सभी को वितरित करें और व्रत का समापन करें. कुछ महिलाएं अगले दिन व्रत खोलती हैं, जबकि कुछ इसी दिन संध्या को भोजन करती हैं।
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