हनुमानगढ़ (गुरुवार)। जैन विश्व भारती संस्थान में योगक्षेम वर्ष के अंतर्गत प्रवास कर रहे युगपुरुष, देवतुल्य, तत्वज्ञाता, शांति और अहिंसा के पुजारी तथा तेरापंथ धर्मसंघ के गणाधिपति आचार्य श्री महाश्रमण जी के दैनिक प्रवचन के दौरान एक आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. शिवकुमार शर्मा (हनुमानगढ़) ने आचार्य श्री के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
अपने पावन प्रवचन में श्रद्धालुओं द्वारा विश्व में बढ़ती युद्ध की विभीषिका और अशांति को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में आचार्य श्री महाश्रमण जी ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व अशांति और भय के वातावरण से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि अपने पूर्व प्रवचनों में भी उन्होंने इस विषय को प्रमुखता से उठाया था और जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, जो एक शांति प्रतिष्ठान के रूप में कार्य कर रहा है, से इस दिशा में ठोस और सकारात्मक पहल करने का आह्वान किया था।
इस संदर्भ में जैन विश्व भारती डीम्ड विश्वविद्यालय के कुलपति श्री बच्छराज दूगड़ ने आचार्य श्री के सानिध्य में निवेदन करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने विशेषज्ञों की राय लेकर एक समुचित ड्राफ्ट तैयार किया है। यह ड्राफ्ट आचार्य श्री के समक्ष प्रस्तुत किया गया है और उनके आशीर्वाद के उपरांत इसे विभिन्न देशों के दूतावासों के माध्यम से भेजा जाएगा। उन्होंने आग्रह किया कि इस पहल के माध्यम से सभी संबंधित पक्ष मानवता के विनाशकारी युद्ध को रोकने के लिए एकजुट होकर प्रयास करें। श्री दूगड़ ने विश्वास व्यक्त किया कि पूज्य गुरुवर के तपोबल से इस प्रयास के निश्चित रूप से सकारात्मक और सुखद परिणाम प्राप्त होंगे।
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