75 वर्ष पुराने नियमों में संशोधन की मांग, शिक्षक संघ ने सौंपा ज्ञापन

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– वेतन संरक्षण समाप्त करने और वसूली कार्रवाई पर जताई आपत्ति, कर्मचारी हित में पुनर्विचार की मांग
हनुमानगढ़।
 राजस्थान शिक्षक संघ (अम्बेडकर) जिला शाखा हनुमानगढ़ ने जिलाध्यक्ष दीपक बारोटिया के नेतृत्व में जिला कलेक्टर के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्रमुख शासन सचिव, वित्त विभाग (नियम), राजस्थान सरकार जयपुर के नाम ज्ञापन सौंपकर सीधी भर्ती से उच्च पदों पर चयनित कार्मिकों को वेतन संरक्षण का लाभ जारी रखने, प्रस्तावित वसूली पर रोक लगाने तथा राजस्थान सेवा नियम, 1951 में आवश्यक संशोधन करने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि वित्त विभाग द्वारा जारी हालिया परिपत्रों के अनुसार सार्वजनिक उपक्रमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं एवं पंचायती राज संस्थाओं से सीधी भर्ती के माध्यम से उच्च पदों पर चयनित कर्मचारियों को पूर्व सेवा का वेतन संरक्षण राजस्थान सेवा नियम, 1951 के नियम 24 एवं 26 के अंतर्गत देय नहीं माना गया है। इसके चलते शिक्षा विभाग में पंचायती राज संस्थाओं से चयनित वरिष्ठ अध्यापक, व्याख्याता, प्रधानाध्यापक सहित अनेक कार्मिकों के पहले से स्वीकृत वेतन संरक्षण को अमान्य मानते हुए वेतन पुनर्निर्धारण और वसूली की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
संघ ने ज्ञापन में कहा कि पंचायती राज के शिक्षक व्यवहारिक रूप से शिक्षा विभाग के अधीन कार्य करते हैं। उनकी सेवा पुस्तिका, पदोन्नति, एसीपी, स्थानांतरण और पेंशन संबंधी कार्य शिक्षा विभाग द्वारा ही संचालित किए जाते हैं। ऐसे में उन्हें वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित करना न्यायोचित नहीं है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित कर्मचारियों ने पूर्व संस्थाओं में नियमित सेवाएं दी हैं तथा राज्य सरकार के अधीन संस्थागत ढांचे में कार्य करते हुए अनुभव और वेतन स्तर अर्जित किया है। एनओसी प्राप्त कर उच्च पदों पर चयनित होने वाले कार्मिकों के अनुभव और वेतन को पूरी तरह नजरअंदाज करना सेवा न्याय एवं समानता के सिद्धांतों के विपरीत है।
संघ ने यह भी तर्क दिया कि राज्य सरकार पूर्व में विभिन्न आदेशों के माध्यम से इन संस्थाओं की सेवाओं को मान्यता देती रही है। वर्ष 2022 में जारी आदेशों के तहत भी इन कर्मचारियों को पुनरीक्षित वेतन नियमों का लाभ प्रदान किया गया था। ऐसे में वर्तमान निर्णय कर्मचारियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

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