दिल्ली में AAP नेता सौरभ भारद्वाज के घर ED की रेड, जानिए क्या है नया अस्पताल घोटाला?

लोकनायक अस्पताल के नए ब्लॉक के लिए 465 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन चार साल में खर्च बढ़कर 1,125 करोड़ तक पहुंच गया। पॉलीक्लिनिक प्रोजेक्ट में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी बताई जा रही है

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj) के घर सहित राजधानी में करीब 13 स्थानों पर छापेमारी की। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अस्पतालों के निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ी है।

इस मामले की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई थी, जब दिल्ली एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) ने AAP सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजनाओं में गड़बड़ियों की जांच शुरू की। इसी सिलसिले में जून 2025 में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। बाद में यह मामला ACB से ईडी को सौंपा गया और जुलाई में केंद्रीय एजेंसी ने इसे अपने हाथ में लिया।

छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि, “सौरभ भारद्वाज के घर ईडी की रेड सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश है। पूरा देश प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री को लेकर सवाल पूछ रहा है। यह मामला उस वक्त का है जब सौरभ मंत्री नहीं थे। आप नेताओं पर लगाए गए सारे केस झूठे हैं।”

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, “सौरभ भारद्वाज के घर ED की रेड हई। ये दिखाता है की मोदी सरकार आप के पीछे पड़ गई है। सरकार हमारी आवाज दबाना चाहती है। हम भाजपा से नहीं डरते। हम देश हितों के साथ खड़े हैं।”

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क्या है पूरा मामला
इससे पहले भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता ने 22 अगस्त 2024 को उपराज्यपाल वीके सक्सेना को शिकायत सौंपी थी। इसी शिकायत के आधार पर 25 जून 2025 को अस्पताल परियोजनाओं की जांच की अनुमति दी गई। आरोप लगाया गया कि तत्कालीन मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन ने मिलीभगत कर स्वास्थ्य विभाग की परियोजनाओं में अनियमितताएं कीं। हालांकि, AAP का कहना है कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं।

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जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 में AAP सरकार ने 5,590 करोड़ रुपए की लागत से 24 अस्पतालों की परियोजनाओं (11 ग्रीनफील्ड और 13 ब्राउनफील्ड) को मंजूरी दी थी। इनमें भारी गड़बड़ियों का आरोप है। कहा गया कि सात ICU अस्पतालों का निर्माण छह महीने में होना था, लेकिन तीन साल बाद भी केवल 50% काम ही पूरा हो पाया, जबकि 800 करोड़ रुपए पहले ही खर्च हो चुके हैं।

 

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इसी तरह, लोकनायक अस्पताल के नए ब्लॉक के लिए 465 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन चार साल में खर्च बढ़कर 1,125 करोड़ तक पहुंच गया। पॉलीक्लिनिक प्रोजेक्ट में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी बताई जा रही है जहां 168 करोड़ की मंजूरी थी, वहां 52 क्लिनिक बनाने में ही करीब 220 करोड़ रुपए खर्च हो गए, जबकि लक्ष्य 94 क्लिनिक बनाने का था।

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