डॉ. सौन देव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में आईएमए का बड़ा फैसला

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-राज्यभर में 24 घंटे की हड़ताल, आरजीएचएस सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद
हनुमानगढ़। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) हनुमानगढ़ शाखा ने जयपुर स्थित निविक अस्पताल के निदेशक डॉ. सौन देव बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यव्यापी हड़ताल की घोषणा की है। आईएमए द्वारा मंगलवार को राज्यपाल के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन दिया। जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह हड़ताल 14 अप्रैल 2026 सुबह 8 बजे से 15 अप्रैल 2026 सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी, जिसमें प्रदेश के सभी निजी चिकित्सा संस्थान अपनी सेवाएं पूर्णतः स्थगित रखेंगे।
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. सुखवीर सिंह गेट और सचिव डॉ. अर्जुन एस राठौड़ ने बताया कि डॉ. बंसल की गिरफ्तारी से पूरे चिकित्सक समुदाय में गहरा आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने कहा कि गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा मामले में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पाई गई, इसके बावजूद आरजीएचएस से जुड़ी कथित मामूली अनियमितताओं के आधार पर आपराधिक कार्रवाई करना अत्यंत चिंताजनक है। इस प्रकार की कार्रवाई से चिकित्सा पेशे की गरिमा और स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
आईएमए की आपात बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हड़ताल के दौरान न केवल सामान्य सेवाएं, बल्कि आपातकालीन सेवाएं भी बंद रहेंगी। इसके अलावा, आरजीएचएस (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम) से जुड़ी सेवाओं को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि आरजीएचएस योजना में लंबे समय से भुगतान में देरी, जटिल प्रक्रियाएं और अनुचित दंडात्मक कार्यवाहियां जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, जिनका समाधान नहीं हो पाया है। आईएमए ने राज्य सरकार से मांग की है कि डॉ. सौन देव बंसल की तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए तथा आरजीएचएस से संबंधित समस्याओं का समाधान चिकित्सक प्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर शीघ्र किया जाए। साथ ही लंबित भुगतानों का जल्द निस्तारण भी सुनिश्चित करने की मांग रखी गई है।
आईएमए पदाधिकारियों ने कहा कि यह कदम चिकित्सकीय पेशे की अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, आमजन को होने वाली असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए उन्होंने इसे व्यापक हित में आवश्यक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।

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