उत्तराखंड के उत्तरकाशी (Uttarkashi cloudburst) में बादल फटने से प्रभावित इलाकों धराली, हर्षिल और सुखी टॉप में सर्च ऑपरेशन जारी है। त्रासदी में अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। 100 से ज्यादा लोग लापता हैं। SDRF, NDRF, ITBP और आर्मी बचाव कार्य में जुटी हैं।
ITBP के प्रवक्ता कमलेश कमल ने बताया- 400 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू किया गया है। 100 से ज्यादा अभी भी फंसे हैं। शाम तक उन्हें भी बचा लिया जाएगा। NDRF डीआईजी शहीदी ने कहा कि सेना के 11 जवान लापता हैं। इधर, केरल के 28 टूरिस्ट्स का ग्रुप धराली की घटना के बाद से लापता है। परिवार के सदस्यों ने कहा- एक दिन पहले सभी ने गंगोत्री की यात्रा पर जाने की बात कही थी, लेकिन लैंडस्लाइड के बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है।
उत्तराखंड में इस तरह की आपदाएं पहले भी समय-समय पर आती रही हैं। इन प्राकृतिक आपदाओं में उत्तरकाशी की तरह ही पूरे के पूरे घर पानी बह गए। इसमें कई घटनाएं अगस्त के महीने में ही हुई हैं। इस आर्टिकल में बताते हैं इससे पहले हुई उन 9 घटनाओं के बारें में जब प्रकृति ने अपना प्रकोप दिखाया।
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धराली गांव टाइम बम पर बैठा है
धराली गांव में 1864, 2013 और 2014 में भी पहाड़ पर बादल फटे थे। इससे खीर नाले ने तबाही मचाई। भूगर्भ वैज्ञानिकों ने तीनों ही आपदाओं के बाद धराली गांव को कहीं और बसाने की सलाह राज्य सरकार को दी। यह भी बताया कि आपदा के लिहाज से धराली टाइम बम पर बैठा है, लेकिन इसे शिफ्ट नहीं किया गया।
जून में भी फट चुका है बादल
जून 2025 में भी उत्तरकाशी के यमुनोत्री हाईवे पर बदाल फटने से कुछ लोग पानी में बह गए। जिस जगह पर पानी आया लहां पर एख होटल का निर्माण किया जा रहा था, जिसमें ये मजदूर काम कर रहे थे। इसमें दो लोगों की मौत हो गई और बाकी के मजदूर आज भी लापता हैं।

अगस्त 2024 में रुद्रप्रयाग में तबाही
पिछले साल अगस्त में कादारनाथ घाटी के रुद्रप्रयाग जिले में बादल फटा था। इसमें करीब 11 लोगों की मौत हुई थी। इसमें कुछ शव राहत बचाव कर्मियों को मलबे से मिले थे। उस दौरान बारिश के बाद नदियों में उफान आ गया था। इसका असर तीर्थयात्रा पर देखने को मिला।

1998 में कुदरत ने दिखाया तांडव
साल 1998 में अगस्त का ही महीना था। मालपा (पिठोरागढ़ जो उस समय उत्तर प्रदेश में था) बादल फटा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आपदा में करीब 221 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना से लैंडस्लाइड हुआ, जिसमें पूरा गांव मिट गया। इसी घटना में भारतीय करालकार प्रेतिमी बेदी की भी मौत हुई थी।
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अन्य बादल फटने की घटनाएं
जुलाई 2024 में घनसाली क्षेत्र टिहरी में बादल फटा था। इसमें एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हुई। इसी सील 31 जुलाई पिथौरागढ़ में फिर से बादल फटने की घटना हुई। इसमें 11 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, कई लोग लापता हो गए थे। 2012 में उत्तरकाशी के उखीमठ क्षेत्र में बादल फटने से 33 लोगों की मौत हो गई। इसमें करीब 35 लोग लापता थे। जुलाई 2014 में टिहरी में 6 लोगों की मौत हुई। साल 2016 में सिंहाली में 12 लोगों की जान बादल फटने से गई थी।
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क्या सच में फटते हैं बादल?
छोटे से इलाके में बहुत कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने को बादल फटना कहते हैं। इसमें बादल के फटने जैसा कुछ नहीं होता। जैसे बहुत सारे पानी से भरी एक बहुत बड़ी पॉलीथीन आसमान में फट गई हो। इसलिए इसे हिंदी में बादल फटना और अंग्रेजी में cloudburst के नाम से पुकारा जाता है।
मौसम विभाग के मुताबिक, जब अचानक 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के इलाके में एक घंटे या उससे कम समय में 100mm या उससे ज्यादा बारिश हो जाए तो इसे बादल फटना कहते हैं। कई बार चंद मिनटों में ये बारिश हो जाती है। यहां अचानक शब्द के भी मायने हैं। आमतौर पर बादल कब फटेगा, इसका पहले से अनुमान लगाना मुश्किल होता है।
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