Bihar Scam: बिहार में कहां गए 70 हजार करोड़?, CAG रिपोर्ट से मचा इन 5 विभागों में हड़कंप

सात वर्षों से अधिक समय बीतने के बाद भी बिहार सरकार यह नहीं बता सकी कि वह धन कहां और कैसे खर्च हुआ।

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पटना: क्या आप सोच सकते हैं कि किसी राज्य सरकार ने ₹70,000 करोड़ से ज़्यादा खर्च कर दिए, लेकिन ये नहीं बताया कि वो पैसा आखिर गया कहां? जी हां, ये सच है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Bihar CAG Report ) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार सरकार ने ₹70,877.61 करोड़ खर्च करने के बाद भी उसका उपयोग प्रमाण पत्र (Utilisation Certificate – UC) अब तक जमा नहीं किया है। ये रिपोर्ट हाल ही में बिहार विधानसभा में पेश की गई है और इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।

CAG रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2024 तक कुल 49,649 उपयोग प्रमाण पत्र लंबित थे। ये प्रमाण पत्र सरकार यह दिखाने के लिए देती है कि फंड को कहाँ और कैसे इस्तेमाल किया गया। लेकिन बिहार में ये फॉर्मल प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है, जिससे ये शक पैदा होता है कि कहीं पैसा गलत दिशा में तो नहीं गया? CAG ने साफ तौर पर कहा है कि “इतनी बड़ी संख्या में यूसी लंबित रहना फंड के दुरुपयोग, गबन या ग़लत जगह खर्च होने का खतरा बढ़ाता है।”

किन विभागों पर सबसे ज़्यादा बकाया? CAG की रिपोर्ट में उन विभागों की स्पष्ट सूची दी गई है जिन्होंने भारी राशि तो खर्च की, लेकिन अब तक उसका वैध प्रमाण नहीं दे पाए:

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विभाग बकाया राशि (₹ करोड़ में)
पंचायती राज विभाग 28,154.10
शिक्षा विभाग 12,623.67
शहरी विकास एवं आवास 11,065.50
ग्रामीण विकास विभाग 7,800.48
कृषि विभाग 2,107.63

इन पांच विभागों की बकाया राशि ही कुल बकाया का लगभग 85 प्रतिशत है, जिससे इनके वित्तीय प्रबंधन पर सीधे सवाल खड़े होते हैं।

GSDP बढ़ा, खर्च हुआ… पर जवाबदेही कहाँ?
राज्य सरकार द्वारा यह दावा किया गया है कि वर्ष 2023-24 में बिहार की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 14.47 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, और कुल ₹2.71 लाख करोड़ के बजट में से 79.92 प्रतिशत राशि खर्च कर दी गई। लेकिन जब इतनी बड़ी राशि के खर्च का दस्तावेज़ी साक्ष्य ही उपलब्ध नहीं है, तो उस पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।

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रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति केवल वर्तमान वर्ष तक सीमित नहीं है। 2016-17 से पहले के भी कुल ₹14,452.38 करोड़ की राशि से संबंधित उपयोगिता प्रमाणपत्र अभी तक लंबित हैं। इसका अर्थ यह है कि सात वर्षों से अधिक समय बीतने के बाद भी सरकार यह नहीं बता सकी कि वह धन कहां और कैसे खर्च हुआ। वित्तीय पारदर्शिता की एक और गंभीर चूक यह रही कि राज्य सरकार ने ₹9,205.76 करोड़ की अग्रिम राशि (AC बिल) जारी की, लेकिन इनमें से कई मामलों में विस्तृत खर्च की जानकारी (DC बिल) अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 22,130 DC बिल लंबित हैं।

फंड लौटाने में भी लापरवाही
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के पास कुल ₹65,512.05 करोड़ की अतिरिक्त बचत थी, जिसमें से केवल ₹23,875.55 करोड़ ही कोष में वापस किया गया। यह महज़ 36.44 प्रतिशत है, जो बताता है कि वित्तीय संसाधनों के उपयोग में गंभीर ढीलापन है।

क्या होता है UC? क्यों है इसकी इतनी अहमियत?
Utilisation Certificate एक तरह की सरकारी रसीद होती है, जो बताती है कि किसी योजना के लिए मिला पैसा वास्तव में उसी योजना में खर्च हुआ या नहीं। ये दस्तावेज़ केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड के उपयोग की पारदर्शिता और अगला फंड रिलीज़ करने का आधार होता है। CAG का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर UCs का न आना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि इससे गबन, फंड का दुरुपयोग और घोटाले की आशंका भी गहराती है।

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