यूएस-इजराइल के साथ ईरान की जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Petrol Diesel Price) के दाम 73 डॉलर से बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। इससे तेल कंपनियों को घाटा हो रहा था। घाटा कवर करने के लिए तेल कंपनियां दाम बढ़ा सकती थीं। इसे लेकर अब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Petrol Diesel Price) में 10-10 रुपए की कटौती कर दी है। पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई है।
क्या एक्साइज डयूटी घटने से कीमत में कमी होगी?
एक्सपर्ट के मुताबिक, इसकी संभावना कम है। भले ही सरकार ने टैक्स कम किया है, लेकिन पेट्रोल-डीजल के रिटेल रेट सीधे सरकार तय नहीं करती। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल कंपनियां कच्चे तेल की कीमत और अपने मुनाफे के आधार पर रेट तय करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां इस छूट का इस्तेमाल अपने पिछले घाटे की भरपाई के लिए करेंगी।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच ड्यूटी में कटौती
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े थे, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ गया। हालांकि, Donald Trump के हालिया बयान के बाद, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत को सकारात्मक बताया और हमलों में विराम की बात कही, बाजार में थोड़ी राहत देखने को मिली है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी आई है।
उपभोक्ताओं को सीधे राहत क्यों नहीं?
सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं को अप्रत्यक्ष रूप से राहत देने के लिए उठाया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक महीने में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। Hardeep Singh Puri के अनुसार, सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाए या उसका कुछ हिस्सा खुद वहन किया जाए। एक्साइज ड्यूटी में कटौती इसी संतुलन को बनाए रखने की कोशिश है।
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पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर भी बदलाव
सरकार ने एक्साइज ड्यूटी के साथ-साथ पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात कर (Export Tax) में भी बदलाव किया है।
- डीजल पर एक्सपोर्ट टैक्स बढ़ाकर 21.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है
- एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स 29.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है
- पेट्रोल पर एक्सपोर्ट टैक्स पहले की तरह शून्य रखा गया है
हालांकि, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा किए जाने वाले निर्यात पर यह टैक्स लागू नहीं होगा।
एविएशन सेक्टर को बड़ी राहत
सरकार ने विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए भी कदम उठाए हैं। घरेलू विमानन ईंधन को टैक्स से छूट दी गई है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन पर बेसिक ड्यूटी में राहत दी गई है। इसका उद्देश्य भारतीय एयरपोर्ट्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और एयरलाइंस के खर्च को कम करना है।
तेल कंपनियों पर क्या असर?
इन फैसलों के बाद तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शेयरों में शुरुआती बढ़त जरूर देखने को मिली, लेकिन बाजार में गिरावट के चलते यह टिक नहीं पाई। Hindustan Petroleum Corporation Limited हाल ही में अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर तक पहुंच चुका है, जबकि Bharat Petroleum Corporation Limited और Indian Oil Corporation Limited भी अपने उच्च स्तर से नीचे कारोबार कर रहे हैं। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों और सरकारी नीतियों के आधार पर इन कंपनियों के मुनाफे और कारोबार पर असर पड़ सकता है।
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