कौन हैं Bnei Menashe? जिन्हें ‘ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन’ के तहत मणिपुर से इज़राइल भेजा जा रहा है..

270

इज़राइल ने भारत में एक खास मिशन शुरू किया है, जिसका नाम “Operation Wings of Dawn” रखा गया है। इस अभियान के तहत मणिपुर में रहने वाले Bnei Menashe समुदाय के करीब 5,000 लोगों को इज़राइल के तेल अवीव में बसाया जा रहा है।

गुरुवार को इस मिशन के तहत करीब 250 लोगों का पहला समूह दिल्ली के रास्ते इज़राइल भेजा गया। इज़राइल सरकार ने पहले ही लगभग 4,600 लोगों के पुनर्वास के लिए फंड देने की घोषणा की थी। पिछले 20 सालों में करीब 5,000 लोग पहले ही इज़राइल जा चुके हैं।

कौन हैं Bnei Menashe?
Bnei Menashe एक ऐसा समुदाय है जो खुद को इज़राइल की खोई हुई जनजातियों में से एक का वंशज मानता है।बाइबल के अनुसार, प्राचीन इज़राइल 12 जनजातियों में बंटा था। इनमें से एक जनजाति Menashe की थी, जिससे यह समुदाय अपना संबंध जोड़ता है।

इतिहास के मुताबिक, 722 ईसा पूर्व में अस्सीरियन हमले के बाद यह जनजाति अपने मूल स्थान से निकलकर कई देशों-जैसे फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन से होते हुए भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों मणिपुर और मिजोरम में आकर बस गई। मणिपुर में इन्हें कुकी समुदाय का हिस्सा माना जाता है। जहां ज्यादातर कुकी ईसाई धर्म अपनाते हैं, वहीं Bnei Menashe यहूदी धर्म और उसकी परंपराओं का पालन करते हैं।

ये भी पढ़ें: Israel Gaza: ट्रंप के इशारे पर इजराइल ने किया गाजा पर सबसे बड़ा हमला, 300 से ज्यादा मौत

इज़राइल क्यों जाना चाहते हैं?
इस समुदाय के इज़राइल जाने की सबसे बड़ी वजह धर्म है। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में धार्मिक परंपराओं को पूरी तरह निभाना उनके लिए मुश्किल है। कुछ धार्मिक अनुष्ठानों के लिए कम से कम 10 लोगों (मिन्यान) की जरूरत होती है, जो वहां आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते। इसके अलावा पारंपरिक भोजन और सांस्कृतिक संसाधनों की कमी भी एक कारण है। इसी वजह से कई लोग हिब्रू भाषा भी सीख रहे हैं, ताकि इज़राइल में आसानी से बस सकें।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

इज़राइल उन्हें क्यों बुला रहा है?
इज़राइल का यह फैसला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक भी माना जा रहा है। हाल के वर्षों में हमास और ईरान के साथ संघर्ष के कारण वहां मजदूरों की कमी हो गई है। नेपाल और थाईलैंड जैसे देशों से आने वाले कामगारों की संख्या भी कम हुई है। ऐसे में Bnei Menashe समुदाय वहां कामगारों की कमी पूरी कर सकता है। साथ ही, इज़राइल उन्हें सीमावर्ती इलाकों में बसाना चाहता है, जिससे वहां की जनसंख्या संतुलन बनाए रखा जा सके।

आर्थिक रुप से मिलती है मजबूती
मणिपुर में इस समुदाय के ज्यादातर लोग खेती या मजदूरी करते हैं। वहीं इज़राइल में उन्हें बेहतर नौकरी और ज्यादा कमाई के मौके मिलते हैं। जहां भारत में उनकी सालाना आय करीब 1,200 डॉलर होती है, वहीं इज़राइल में यह बढ़कर करीब 55,000 डॉलर तक पहुंच जाती है। हालांकि, वहां बसने के बाद उन्हें नस्लभेद और नई तकनीकी जीवनशैली जैसी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है।

मणिपुर हिंसा का असर
2023 में मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के बीच हुए हिंसक संघर्ष ने भी इस समुदाय की जिंदगी को प्रभावित किया है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हुई है और कई लोग बेहतर भविष्य के लिए इज़राइल जाना चाहते हैं।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।