पृथ्वी पर जीवों को जीवित रहने के लिए आग, हवा, पानी, भोजन इत्यादि की आवश्यकता होती है। जिसमें पानी का अपना एक अलग ही महत्व है। पानी को पृथ्वी पर जीवन का आधार माना जाता है। देखा जाए तो पृथ्वी का जैवमंडल पूरी तरह से पानी पर ही आश्रित है। ऐसे में यदि पृथ्वी में पानी खत्म हो जाए तो क्या होगा? सोचते ही दिल दहल उठता है। लेकिन बहुत ही जल्द यह हकीकत में तब्दील होने वाला है। आज पूरा विश्व जल संकट से जूझ रहा है। अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि यह जल संकट है क्या? इसका पानी से क्या वास्ता? क्या वास्तव में पृथ्वी का पानी खत्म हो सकता है? क्या पानी के स्थान पर कोई और तरल का इस्तेमाल किया जा सकता है? आइए इन सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं।
पृथ्वी पर मौजूद जल
आंकड़ों की मानें तो पृथ्वी का 71% हिस्सा पानी से ढका हुआ है। पृथ्वी पर मौजूद पानी का 96.5% पानी महासागरों और समुद्रों में है जो बेहद ही खारा है। इस पानी का इस्तेमाल पीने के लिए नहीं किया जा सकता है। पृथ्वी पर मौजूद 3.5% पानी ही इंसानों और जीवो के पीने योग्य है। जो भूजल, झील, नदियां, तालाब आदि के रूप में उपलब्ध है।
जल संकट और इसका इतिहास
जल संकट एक ऐसी स्थिति है जहां एक बड़े से क्षेत्र के लोगों को पीने का साफ पानी नहीं मिल पाता है और लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि करने लगते हैं। केरला इसका जीवंत उदाहरण है। कुछ दिनों पहले केरला में पीने का पानी लेने के लिए लोगों के बीच मारपीट शुरू हो गई थी जिसमें एक की मौत हो गई थी। यह महज एक उदाहरण है ऐसे हजारों मामले हैं जहां जल के अभाव के कारण हिंसा की घटनाएं सामने आई है। जल संकट की समस्या के बात करें तो यह कोई नई समस्या नहीं है। इसकी शुरुआत इंग्लैंड से होती है। जब 1700-1800 ईसवी में इंग्लैंड में औद्योगीकरण और शहरीकरण की शुरुआत हुई थी। तब साफ पानी की जरूरत महसूस की गई। 1800 ईसवी में पहली बार पानी की कमी को दर्ज किया गया था। सन 1854 में डॉ जॉन ने पानी और कोलेरा के फैलने के बीच के संबंध को विस्तार के साथ बताया। जिसके बाद पीने के साफ पानी की मांग और भी बढ़ गई।
जल संकट का मामला उस वक्त तूल पकड़ने लगा जब 1900 में सूखा पड़ने के कारण 11 मिलियन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस दौरान करीब 2 बिलियन लोग इससे प्रभावित हुए थे। पानी की बढ़ती समस्या को देखते हुए 1993 में यूनाइटेड स्टेट्स ने 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को पीने के साफ पानी को लेकर जागरूक करना, पानी की अनावश्यक उपयोगिता को कम करना और लोगों को पानी की महत्ता के बारे में समझाना इसका मुख्य उद्देश्य था। अगर आंकड़ों की मानें तो मौजूदा समय में पूरे विश्व में तकरीबन 844 मिलियन लोग जल संकट से जूझ रहे हैं। यानी हर 10 में से एक इंसान जल संकट की मार झेल रहा है।
जल संकट का भारत पर असर
जल संकट की मार से हमारा देश भारत भी अछूता नहीं रहा है। आंकड़ों की मानें तो भारत में करीब 60 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। नीति आयोग के आंकड़े तो ओर भी हैरान करने वाले हैं। नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार हर साल तकरीबन दो लाख लोग खराब पानी के इस्तेमाल के कारण अपनी जान गवां देते हैं। समग्र जल प्रबंधन सूचकांक की एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर हो जाएगी। इसलिए इस समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा उतना ही हमारे देश के नागरिकों के लिए बेहतर होगा। नीति आयोग के दूसरे रिपोर्ट के अनुसार 2020 यानी अगले साल भारत के 21 बड़े शहरों में भूजल समाप्त हो जाएगा और 2030 तक देश के तकरीबन 40% आबादी पीने के साफ पानी के लिए तरसेगी।
पानी का बचाव
हम हर रोज ना जाने कितने ही लीटर पानी को बर्बाद कर देते हैं। यह हमारी लापरवाही के कारण होता है। हमारी थोड़ी सी समझदारी हर रोज सैकड़ों लीटर तक पानी बचा सकती है। आइए हम उन गतिविधियों पर नजर डालते हैं जिससे हम हर रोज सैकड़ों लीटर पानी बचा सकते हैं। घर में पानी बचाने के दो तरीके है। पहला है रिड्यूस यानी पानी का कम इस्तेमाल करना। दूसरा तरीका है रीयूज यानी इस्तेमाल किए गए पानी का फिर से इस्तेमाल करना। आइए सबसे पहले हम उन गतिविधियों पर नजर डालते हैं जिससे हम पानी बचा सकते हैं:-
1. अक्सर देखा गया है कि लोग बर्तन धोते समय पानी का नल खुला रखते हैं जिससे काफी मात्रा में पानी बर्बाद होता है। अगर नल के स्थान पर बड़े बर्तन में पानी रखकर बर्तन धोए जाए तो काफी मात्र में पानी बचाया जा सकता है।
2. नहाते वक्त सावर से कितना पानी बर्बाद होता है कोई नहीं बता सकता लेकिन उसके जगह बाल्टी और मग का इस्तेमाल करके सावर से होने वाले पानी की बर्बादी को कम किया जा सकता है।
3. ब्रश करते समय मग का इस्तेमाल कर नलों से बेकार बहने वाले पानी को बचाया जा सकता है।
4. अक्सर लोग बाइक या कार धोते वक्त पाइप का इस्तेमाल करते हैं जिससे काफी ज्यादा पानी की बर्बादी होती है। वही बाइक या कार धोते वक्त बाल्टी और मग का इस्तेमाल करके 50 से 100 लीटर तक पानी बचाया जा सकता है।
ऐसे ही कई गतिविधियां है जिससे हम अपने घर में आसानी से पानी की बचत कर सकते हैं। बस हमें थोड़ी समझदारी से काम करना होगा।
अब बात करते हैं रीयूज करने के तरीकों की यानी कि इस्तेमाल किए गए पानी का हम फिर से कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए कुछ तरीकों के बारे में जानने की कोशिश करते हैं। हमारे द्वारा इस्तेमाल किए गए पानी को दो भागों में बांटा गया है: ग्रे वाटर और ब्लैक वाटर। हमारे टॉयलेट फ्लश जैसी जगहों से निकलने वाला पानी ब्लैक वाटर की लिस्ट में आता है। ऐसे पानी को दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए इन्हें गटर में ही भेज देना उचित होता है।
नहाते समय हमारे द्वारा इस्तेमाल किया गया पानी, आरो के फिल्टर से निकलने वाला पानी, हमारे घर के बेसिन से निकलने वाला पानी, ए.सी. के आउटलेट पर निकलने वाला पानी आदि ग्रे वाटर की लिस्ट में आता है। इन स्रोतों से निकलने वाले पानी को हम फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए देखते हैं कि हम किस तरह इस ग्रे वाटर का इस्तेमाल फिर से कर सकते हैं।
1. एसी के आउटलेट से निकलने वाला पानी बेहद ही साफ होता है क्योंकि यह हमारे कमरे की नमी का कंडेंस्ड रूप होता है। एक एसी 1 दिन में तकरीबन 5 से 10 लीटर पानी जमा कर सकता है। इसका इस्तेमाल बर्तन धोने, नहाने या फिर पौधों की सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
2. आरो से निकलने वाला पानी भी बहुत ही साफ होता है। बस इस में नमक की मात्रा थोड़ी ज्यादा होती है। इसका इस्तेमाल कपड़े धोने या फिर बर्तन धोने के लिए आसानी से किया जा सकता है।
3. हमारे बेसिन और बाथरूम से निकलने वाला पानी भी उपयोग करने के लायक होता है। इसमें सिर्फ डिटर्जेंट और थोड़ा साबुन का अंश होता है। इसका इस्तेमाल पौधों में पानी देने के लिए किया जा सकता है अगर उसमें ब्लीच का इस्तेमाल ना हुआ हो तो।
ऐसे ओर भी कई तरीके हैं जिसका इस्तेमाल कर पानी का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
वर्षा जल संचयन
वर्षा के जल को संचयित करने के बहुत से तरीके हैं लेकिन मुख्य रूप से दो तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है:-
1. सतही अपवाह कटाई– शहरी इलाकों में अक्सर वर्षा का पानी मैदानों या नालियों में बहकर बर्बाद हो जाता है। इसी बहते पानी को सतही अपवाह कटाई की मदद से रोका जाता है और इसका इस्तेमाल बागवानी, सिंचाई और अन्य कामों में किया जाता है।इसका इस्तेमाल भूजल के स्तर को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।
2. छत वर्षा जल संचयन– यह एक ऐसी व्यवस्था है जहां छत पर जमा होने वाले वर्षा के जल को एकत्र किया जाता है ताकि बाद में उसका इस्तेमाल किया जा सके। इस विधि में छत पर एक केचमेंट बनाया जाता है जिसकी मदद से वर्षा के पानी को जमा किया जाता है और एक पाइप की मदद से टैंक में भेजा जाता है। इस पानी का इस्तेमाल नहाने, बर्तन धोने, कपड़े साफ करने या फिर पौधों को देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ लोग फिल्टर का इस्तेमाल करके इस पानी को पीने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। कई बार लोग छत के पानी को अपने कुएं के जल स्तर को बढ़ाने के लिए भी करते हैं। कई बार देखा गया है कि वर्षा के जल को भूजल का स्तर बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।
इन तरीकों के अलावा कई और तरीके हैं जिसका इस्तेमाल कर लोग बारिश के पानी को संग्रहित कर उसका इस्तेमाल करते हैं इन तरीकों में से कुछ का जिक्र नीचे किया गया है:-
1. बैरल– यह एक बहुत ही साधारण और आसान तरीका है। इसमें छत से गिर रहे पानी को एक बैरल में जमा किया जाता है और उसका इस्तेमाल घरेलू कामों में किया जाता है।
2. ड्राई सिस्टम– यह तरीका भी बैरल की तरह काम करता है। इसमें एक पाइप की मदद से एक बड़े से टैंक में पानी को जमा किया जाता है।
3. ग्रीन रूफ– इस विधि में छत के पानी को पाइप की सहायता से सीधे बगीचे की ओर मोड़ दिया जाता है। ताकि छत का सारा पानी बगीचे की सिंचाई के काम आ जाए।
सरकार के लिए सुझाव
आज हमारे देश में जल के अभाव के कारण कई हिंसक वारदातें सामने आ रही है। लेकिन सरकार अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं। सरकारों की बातों से तो साफ लगता है कि बेबी पानी की समस्या से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। सरकार बी किसानों की तरह बारिश से आस लगाए बैठी है। अगर सरकार का रवैया ऐसा ही रहा तो वह दिन दूर नहीं जब टैंकर माफिया भी अपनी मनमानी करने लगेगा। ऐसे में सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कोई ठोस कदम उठाना पड़ेगा। साथ ही सरकार को यह कोशिश भी करनी चाहिए भी करनी चाहिए कि देश के सभी नागरिकों को पीने का साफ पानी उपलब्ध हो। साथ ही सरकार को तालाब और कुएं जैसी परियोजनाओं पर बल देना चाहिए बारिश के पानी को एकत्र किया जा सके और उसका इस्तेमाल सिंचाई और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए किया जा सके।
नागरिकों से अनुरोध
देश के नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। नागरिकों को भी इस बात का ध्यान रखना होगा कि पानी का कम से कम इस्तेमाल हो। साथ ही नागरिकों को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि पाइप की लीकेज की जानकारी सरकारी अधिकारियों को दें ताकि पानी की बर्बादी को कम किया जा सके। इतना ही नहीं नागरिकों को पानी को रीयूज करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
– सर्वेश्वर मंडल
डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य और व्यक्त किए गए विचार पञ्चदूत के नहीं हैं, तथा पञ्चदूत उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।
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