मंच से शिवराज पर हमला, नड्डा को चिढ़ाना, जज के खिलाफ चाल, जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की असली वजह कौन?

BJP सांसदों में हस्ताक्षर अभियान की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी। पहली बार ऐसा लगने लगा कि पार्टी खुद ही उपराष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की राह चुन सकती है।

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उप राष्ट्रपति पद पर रहते हुए जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) की बढ़ती असहमति आखिरकार उनके इस्तीफे तक पहुंची। कुछ महीने पहले तक जिनका कद सत्ता के सबसे करीब माना जाता था, वही अब पार्टी नेतृत्व के लिए असहज हो गए थे। तीन बड़े घटनाक्रमों ने इस टकराव को साफ कर दिया — शिवराज पर मंच से सीधा हमला, जस्टिस वर्मा पर महाभियोग की अलग लाइन और राज्यसभा में जेपी नड्डा से खुला तनाव। आइए समझते हैं पूरी कहानी।

सबसे पहले जानते हैं, आखिर उन्होंने 10 जुलाई, 2025 को ऐसा क्या कहा था कि उनके इस्तीफे को इस्तीफा न समझकर राजनीति समझा जा रहा है। दरअसल 10 जुलाई 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ दिल्ली में जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्पीच दे रहे थे। बोले- ‘I will retire at the right time, August 2027, subject to divine intervention.’ मतलब- मैं सही समय पर रिटायर होऊंगा। और वह समय है अगस्त 2027, अगर कोई दिव्य शक्ति आ जाए तो बात अलग है।’

जगदीप धनखड़ ही जानते हैं कि वे किस दिव्य शक्ति की बात कर रहे थे, लेकिन 21 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दे दिया। वजह खराब सेहत बताई। बातें ये भी हुईं कि क्या सच में खराब सेहत की वजह से धनखड़ ने इस्तीफा दिया या इसकी स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी, क्या सरकार से उनकी दूरी बढ़ रही थी। यहां जानें वो 3 स्टोरी जिन्होंने उठाए कई सवाल?

शिवराज से सवाल: किसानों से जो वादा किया था, वो निभाया क्यों नहीं?
3 दिसंबर 2024, मुंबई में केंद्रीय कपास प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान के शताब्दी समारोह में मंच पर बैठे थे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़। सब कुछ सामान्य चल रहा था जब अचानक धनखड़ ने किसानों से किए गए वादों को लेकर शिवराज सिंह को सार्वजनिक तौर पर घेर लिया। धनखड़ ने शिवराज की ओर इशारा करते हुए कहा— कृषि मंत्री जी, आपका एक-एक पल भारी है। मेरा आपसे आग्रह है कि बताइए किसानों से क्या वादा किया गया था और क्यों नहीं निभाया गया?” 

यह सवाल सीधे उस पृष्ठभूमि से जुड़ा था जब किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार ने MSP और अन्य मांगों पर भरोसा दिलाया था। मंच से इस तरह का तीखा सवाल पार्टी और RSS को नागवार गुज़रा। बताया गया कि धनखड़ को चेतावनी दी गई कि दोबारा ऐसा हुआ तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। हालांकि, शिवराज सिंह ने व्यक्तिगत तौर पर इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

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जस्टिस वर्मा पर महाभियोग: क्यों चलाई अलग चाल?
जस्टिस यशवंत वर्मा के घर जब जले हुए नोटों के बंडल बरामद हुए, तो लोकसभा में 150 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर दस्तखत कर दिए। ये संख्या पर्याप्त थी। लेकिन धनखड़ ने राज्यसभा में खुद अपने सदन के 63 विपक्षी सांसदों के साइन से अलग प्रस्ताव तैयार किया।

सवाल उठने लगे कि जब लोकसभा में जरूरी संख्या पहले ही पूरी हो चुकी है, तो राज्यसभा में अलग प्रस्ताव लाने का क्या मकसद? सूत्र बताते हैं कि धनखड़ चाहते थे कि यह प्रक्रिया उन्हीं के सदन से शुरू हो। इससे कानून मंत्री किरेन रिजिजू भी नाराज हुए।

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सदन में टकराव: जब नड्डा से भिड़े धनखड़
21 जुलाई 2025 मानसून सत्र के पहले ही दिन ऑपरेशन सिंदूर पर संसद गरमाई हुई थी। लोकसभा में राहुल गांधी बोले तो उन्हें स्पीकर ओम बिरला ने रोक दिया, लेकिन राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की छूट मिल गई। खड़गे सिर्फ नियमों पर बोलने वाले थे, लेकिन उन्होंने भाषण देना शुरू कर दिया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आपत्ति जताई और धनखड़ से कहा कि “आपने सिर्फ नियम पर बोलने की अनुमति दी थी, ये तो भाषण दे रहे हैं।”

लेकिन धनखड़ ने खड़गे को नहीं रोका। यहीं से टकराव खुला हो गया। बाद में नड्डा ने नाराज़गी ज़ाहिर की और कहा कि “सिर्फ मेरी बात रिकॉर्ड में दर्ज होनी चाहिए।” PAC की मीटिंग भी बिखर गई — नड्डा और रिजिजू बिना बताए नदारद रहे। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री तक को जानकारी दी गई और वहीं से संदेश गया कि अब बहुत हो चुका।

रात 9 बजे इस्तीफा
BJP सांसदों में हस्ताक्षर अभियान की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी थी। पहली बार ऐसा लगने लगा कि पार्टी खुद ही उपराष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की राह चुन सकती है। इससे पहले कि मामला आगे बढ़े, उसी रात करीब 9 बजे जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया।

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