-पुरानी पेंशन बहाली, समान वेतन, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण सहित विभिन्न मांगों पर सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग
हनुमानगढ़। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (जो अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ से सम्बद्ध है) के बैनर तले बुधवार को जिला मुख्यालय पर कर्मचारियों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन कर 11 सूत्री मांग पत्र जिला कलक्टर को सौंपा। महासंघ के जिलाध्यक्ष चन्द्रभान ज्याणी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में विभिन्न विभागों के सैकड़ों कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
धरने के दौरान महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग है कि पीएफआरडीए अधिनियम को निरस्त किया जाए और राज्य कर्मचारियों के 53 हजार करोड़ रुपये उनके जीपीएफ खातों में जमा कराए जाएं। साथ ही राजस्थान में पहले से लागू परिभाषित पुरानी पेंशन योजना (OPS) को यथावत रखा जाए। उन्होंने कहा कि नई पेंशन नीति कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है और इससे भविष्य की सुरक्षा खतरे में है।
मांग-पत्र में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार, बोर्ड, निगम, स्वायत्तशासी संस्थाओं, पंचायतीराज और सहकारी संस्थाओं में कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए “समान कार्य के लिए समान वेतन” की नीति लागू की जाए तथा न्यूनतम वेतन ₹26,000 निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही पूर्व के वेतनमानों में उत्पन्न विसंगतियों का निराकरण कर उचित वेतन पुनर्निर्धारण किया जाए।
महासंघ ने वित्त विभाग की 30 अक्टूबर 2017 की अधिसूचना के तहत अनुसूची-5 में किए गए संशोधनों को निरस्त करने और 28 जून 2013 की अधिसूचना के अनुसार वेतन निर्धारण करने की मांग रखी। साथ ही जनवरी 2020 से जून 2021 तक के मंहगाई भत्ते (DA) के एरियर का नकद भुगतान करने की भी मांग की गई। ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को मूल वेतन का 10 प्रतिशत ग्रामीण भत्ता स्वीकृत करने की बात भी कही गई।
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