ईरान में 10 लाख से ज्यादा लड़ाके तैयार! अमेरिका से जंग के खतरे के बीच बड़ी हलचल

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। जहां एक ओर ईरान बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिन पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान में हालात तेजी से बदल रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित जमीनी युद्ध (Iran US war 2026) की आशंका के बीच देश में एक मिलियन यानी 10 लाख से ज्यादा लड़ाकों को तैयार कर लिया गया है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे साफ है कि ईरान किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहा है। तेहरान स्थित Tasnim न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सेना से जुड़े सूत्रों ने बताया कि बड़ी संख्या में युवाओं ने खुद आगे आकर सेना में शामिल होने की इच्छा जताई है। भर्ती केंद्रों पर इतनी भीड़ है कि वहां संभालना मुश्किल हो रहा है।

वहीं, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 एक्स्ट्रा सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस फोर्स में पैदल सेना और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हो सकती हैं। यह एक्स्ट्रा सैनिक मिडिल ईस्ट में पहले से मौजूद 5,000 मरीन और 2,000 पैराट्रूपर्स के साथ जोड़े जाएंगे। ये पैराट्रूपर्स 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से हैं।

इधर कूटनीतिक स्तर पर भी हालात बिगड़ते जा रहे हैं। Donald Trump भले ही यह दावा कर रहे हों कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, लेकिन तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के अधिकारियों ने साफ कहा है कि अगर अमेरिकी सेना ने उनकी जमीन पर कदम रखा, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा। दोनों देशों के बीच बयानबाजी से साफ है कि तनाव कम होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे।

अमेरिका ने जमीनी हमला किया, तो उसका मुकाबला लंबा और महंगा होगा?
ईरान की Basij मिलिशिया, Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) और राष्ट्रीय सेना के भर्ती केंद्रों पर युवाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। अधिकारियों ने इसे ‘जबरदस्त उत्साह की लहर’ बताया है। कई स्वयंसेवकों का कहना है कि अगर अमेरिका ने जमीनी हमला किया, तो उसका मुकाबला लंबा और महंगा साबित होगा।

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Strait of Hormuz बना बड़ा मुद्दा
इस तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट बन गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका इस जलमार्ग पर नियंत्रण की कोशिश करता है, तो इसे बंद किया जा सकता है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में इसका बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर डाल सकता है।

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अमेरिका पर भी बढ़ रहा दबाव
दूसरी तरफ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिकी सेना पर भी दबाव बढ़ रहा है। पिछले दो हफ्तों में अमेरिका और उसके सहयोगियों ने करीब 11,000 हथियारों का इस्तेमाल किया है, जिसकी लागत लगभग 26 अरब डॉलर बताई जा रही है।इस तेज खर्च की वजह से आधुनिक हथियारों का स्टॉक कम हो रहा है, जिससे आगे की रणनीति पर असर पड़ सकता है।

तेल और समुद्री रास्तों पर रणनीति
हाल ही में एक कैबिनेट बैठक में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका को 10 तेल टैंकर लेने की अनुमति दी, जिसे उन्होंने अपनी ताकत का संकेत बताया। हालांकि दूसरी तरफ ईरान ने होर्मुज के रास्ते पर सख्ती बरकरार रखी है। अमेरिका या इजरायल से जुड़े जहाजों पर रोक लगाई जा रही है, जबकि कुछ अन्य देशों को सीमित अनुमति दी जा रही है।

कुल मिलाकर, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। जहां एक ओर ईरान बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिन पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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