IPL का करोड़ों का खेल: 300 करोड़ से 15,000 करोड़ तक कैसे पहुंची टीमों की कीमत? समझिए पूरा बिजनेस मॉडल

आईपीएल की बढ़ती लोकप्रियता, डिजिटल स्ट्रीमिंग का विस्तार, विज्ञापन बाजार की मजबूती और वैश्विक दर्शकों की बढ़ती संख्या ने इसे एक मजबूत बिजनेस प्लेटफॉर्म बना दिया है।

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IPL के 19वें सीजन का आगाज आज से होगा। पहला मैच डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच खेला जाएगा। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का नया सीजन शुरू होने से पहले ही यह टूर्नामेंट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। वजह है टीमों की चौंकाने वाली वैल्यूएशन।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की कीमत करीब 16,660 करोड़ रुपये और राजस्थान रॉयल्स की वैल्यू लगभग 15,500 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। यह आंकड़े न सिर्फ भारतीय खेल जगत बल्कि वैश्विक स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के लिहाज से भी बेहद बड़े माने जा रहे हैं।

अगर 2008 की शुरुआत से तुलना करें, तो उस समय इन टीमों की कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये के आसपास थी। यानी महज 18 साल में इनकी वैल्यू कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आईपीएल का बिजनेस मॉडल कैसे काम करता है और टीमें इतनी बड़ी कमाई कैसे करती हैं।

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IPL का असली पैसा कहां से आता है?
आईपीएल की पूरी आर्थिक संरचना भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंट्रल पूल पर टिकी होती है। बोर्ड की सबसे बड़ी कमाई मीडिया राइट्स से होती है। 2023 से 2027 के बीच मीडिया अधिकारों की कुल वैल्यू लगभग 50,000 करोड़ रुपये है, जिससे हर साल करीब 9,500 से 10,000 करोड़ रुपये की आमदनी होती है। इसके अलावा, टाइटल स्पॉन्सर और अन्य केंद्रीय प्रायोजकों से भी हर साल करीब 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये मिलते हैं। इस तरह कुल मिलाकर BCCI के सेंट्रल पूल में सालाना लगभग 12,000 करोड़ रुपये आते हैं।

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इस रकम का बंटवारा एक तय फॉर्मूले के तहत होता है:

मद प्रतिशत अनुमानित राशि (₹ करोड़)
BCCI का हिस्सा 50% 6000
फ्रेंचाइजी टीमों में वितरण 45% 5400
इनामी राशि व अन्य खर्च 5% 600

इस व्यवस्था के तहत हर टीम को सिर्फ सेंट्रल पूल से ही हर साल औसतन लगभग 540 करोड़ रुपये मिलते हैं।

टीमों की अपनी कमाई के स्रोत
BCCI से मिलने वाली रकम के अलावा आईपीएल टीमों के पास कई अन्य आय के स्रोत भी होते हैं, जो उनकी कुल कमाई को और बढ़ाते हैं।

आय का स्रोत अनुमानित सालाना कमाई (₹ करोड़)
स्पॉन्सरशिप (जर्सी, ब्रांडिंग) 80–120
टिकट बिक्री 40–80
मर्चेंडाइज (जर्सी, कैप आदि) 20–40
विज्ञापन, डिजिटल व लाइसेंसिंग 20–30

इन सभी स्रोतों को मिलाकर किसी भी प्रमुख फ्रेंचाइजी की कुल सालाना कमाई लगभग 700 से 800 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।

खर्च कितना होता है?
आईपीएल टीम चलाना जितना लाभदायक है, उतना ही खर्चीला भी है। खिलाड़ियों की सैलरी से लेकर यात्रा, मार्केटिंग और संचालन तक कई मदों में भारी खर्च होता है।

खर्च का प्रकार अनुमानित सालाना खर्च (₹ करोड़)
खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ का वेतन 120–130
यात्रा और होटल 40–60
मार्केटिंग और ब्रांडिंग 30–50
प्रशासन और प्रबंधन 20–30
मैच डे संचालन खर्च 20
BCCI के साथ राजस्व साझेदारी 20–40

इस तरह एक फ्रेंचाइजी का कुल सालाना खर्च करीब 250 से 330 करोड़ रुपये के बीच बैठता है।

कितना होता है मुनाफा?
अगर किसी टीम की सालाना कमाई 700 से 800 करोड़ रुपये है और खर्च 250 से 330 करोड़ रुपये के बीच है, तो औसतन हर टीम को 350 से 500 करोड़ रुपये तक का मुनाफा होता है। चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर जैसी बड़ी टीमें इस रेंज में या उससे अधिक लाभ कमाने में सफल रहती हैं, जबकि छोटी टीमों का मुनाफा भी 200 से 300 करोड़ रुपये के बीच रहता है।

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क्यों तेजी से बढ़ रही है IPL की वैल्यू?
आईपीएल की बढ़ती लोकप्रियता, डिजिटल स्ट्रीमिंग का विस्तार, विज्ञापन बाजार की मजबूती और वैश्विक दर्शकों की बढ़ती संख्या ने इसे एक मजबूत बिजनेस प्लेटफॉर्म बना दिया है। यही वजह है कि निवेशकों के लिए आईपीएल टीमें अब सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक स्थायी और लाभदायक निवेश का जरिया बन चुकी हैं।

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