ब्राजील में हुए ब्रिक्स 2025 (BRICS) शिखर सम्मेलन में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा करने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा है कि जो देश अमेरिका विरोधी नीति अपनाएंगे, उन पर अमेरिका 10% तक का अतिरिक्त टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाएगा।
इससे पहले 1 जुलाई को भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की मेंबरशिप वाले QUAD (क्वाड) ग्रुप के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी पहलगाम हमले की निंदा की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट में कहा कि पहलगाम आतंकी हमला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत पर चोट है। आतंकवाद की निंदा हमारा सिद्धांत होना चाहिए, सुविधा नहीं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने BRICS से जुड़ने की इच्छा रखने वाले नए देशों पर एक्स्ट्रा 10% टैरिफ का ऐलान किया है।
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क्या है पूरा मामला?
ब्रिक्स 2025 सम्मेलन ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में हुआ, जिसमें 10 देश शामिल हुए, भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात। सम्मेलन में सभी देशों ने ईरान की सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों की कड़ी आलोचना की। इस बयान में हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन बताया गया।
क्या धमकी दी ट्रंप ने
अगर कोई देश अमेरिका के खिलाफ खड़ा होगा, तो हम उस पर आर्थिक कार्रवाई करेंगे। अमेरिका विरोधी देशों के सामान पर हम 10% तक का अतिरिक्त टैक्स लगाएंगे।”
ब्रिक्स का क्या रुख रहा?
ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों ने मिलकर एक संयुक्त बयान में कहा कि ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन किया गया है और यह हमला गलत और अवैध है। ईरान को 2024 में ब्रिक्स में शामिल किया गया था, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक और रणनीतिक रूप से अहम बन गया।
ब्रिक्स ने टैरिफ पर क्या कहा?
ब्रिक्स ने अपने घोषणापत्र में अमेरिका और ट्रंप का बिना नाम लिए आलोचना की है। घोषणापत्र के अनुसार, ब्रिक्स सदस्यों ने “एकतरफा टैरिफ में वृद्धि के बारे में गंभीर चिंता” व्यक्त करते हुए कहा कि टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने का खतरा है। ब्राजील, भारत और सऊदी अरब जैसे अमेरिकी सहयोगियों को देखते हुए, घोषणापत्र में किसी भी बिंदु पर अमेरिका या उसके राष्ट्रपति की नाम लेकर आलोचना नहीं की गई।
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क्या है ब्रिक्स?
ब्रिक्स (BRICS) पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं—ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—का एक समूह है, जो दुनिया की भू-राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम शक्ति बनकर उभरा है। इसका नाम इन देशों के अंग्रेज़ी नामों के पहले अक्षरों से मिलकर बना है। ब्रिक्स का उद्देश्य है—विकासशील देशों की आवाज़ को वैश्विक मंच पर मज़बूत करना, पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले संस्थानों (जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक) के विकल्प खड़े करना, और व्यापार, निवेश, सुरक्षा व तकनीकी सहयोग बढ़ाना।

BRICS में भारत की भूमिका भारत BRICS का एक संस्थापक सदस्य है और इसकी वैचारिक नींव में योगदान देने वालों में शामिल है। भारत BRICS के माध्यम से:
- वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति की वकालत करता है।
- वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मज़बूत करने की कोशिश करता है।
- तकनीकी, डिजिटल और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में सक्रिय रहता है।
क्या है BRICS की ताकत
- यह समूह विश्व की 42% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
- वैश्विक GDP में इसकी हिस्सेदारी लगभग 26% है।
- दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाजार ब्रिक्स देशों में हैं।
- ऊर्जा संसाधनों, कृषि उत्पादन और तकनीकी विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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