Russian Oil: क्या भारत वाकई रूस से मुंह मोड़ रहा है? जानें ट्रंप के बयान में कितनी सच्चाई?

509

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत जल्द ही रूस से तेल खरीदना बंद ( Russian Oil ) कर देगा, लेकिन ताज़ा आंकड़े इस दावे को खारिज करते नज़र आ रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि रूस से तेल आयात रोक दिया जाएगा। उन्होंने यह बयान बुधवार को उस समय दिया, जब अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की सज़ा के तौर पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया।

इस फैसले के बाद भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो दुनिया के किसी भी देश पर लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफ़ में गिना जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि यह प्रक्रिया अस्थायी है और जल्द खत्म होगी। उन्होंने चीन पर भी नजर रखने की बात कही ताकि रूस की ऊर्जा से होने वाली आमदनी को सीमित किया जा सके।

भारत-चीन बने रूस के प्रमुख ग्राहक
ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि अगर भारत रूस से तेल की खरीद रोक दे, तो रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति बहाल करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त होने के बाद भारत फिर से रूस के साथ व्यापार कर सकता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि भारत और चीन अब भी रूस के समुद्री कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं।

भारत की ओर से ट्रंप के बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रूस से तेल खरीद का बचाव करते हुए कहा था कि रूस भारत का “पुराना और भरोसेमंद साझेदार” है और यूक्रेन संघर्ष के बावजूद यह ऊर्जा साझेदारी जारी रहेगी।

ट्रंप के दावों पर क्या बोला भारत
ट्रंप के दावों के बाद भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत तेल और गैस का एक महत्वपूर्ण आयातक है। अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हमारी निरंतर प्राथमिकता रही है।” उन्होंने कहा कि भारत अपने लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए ही फैसला लेता है।

आंकड़े क्या कहते हैं?
क्लीन एयर रिसर्च सेंटर (CREA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारत रूस के जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा। भारत ने उस महीने रूस से करीब 3.6 अरब यूरो (लगभग ₹25,600 करोड़) का आयात किया। इसमें से 77% हिस्सा कच्चे तेल का था, जबकि कोयला और तेल उत्पाद क्रमशः 13% और 10% के हिस्से पर रहे।

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने रूस से आयात में तेज़ी से बढ़ोतरी की है। जहां पहले रूसी तेल का हिस्सा कुल आयात में 1% से भी कम था, वहीं अब यह 40% के करीब पहुंच गया है।

सस्ता तेल और रणनीतिक जरूरत
मध्य पूर्व पर निर्भर भारत के लिए रूस से मिलने वाला तेल एक सस्ता विकल्प साबित हुआ है। कई बार यह बाजार दर से 18-20 डॉलर प्रति बैरल तक कम दाम पर मिलता है। सितंबर में रूस के उराल क्रूड पर छूट बढ़कर 39% तक पहुंच गई।

ग्लोबल रिस्क एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म Kharon के मुताबिक, रूस का तेल भारी और सल्फरयुक्त है, जो भारतीय रिफाइनरियों की प्रोसेसिंग क्षमता के अनुकूल है। इसलिए अमेरिकी या पश्चिमी देशों का हल्का तेल भारत के लिए वैकल्पिक रूप से उतना उपयुक्त नहीं है।

पंचदूत अब व्हाट्सएप चैनल पर उपलब्ध है। लिंक पर क्लिक करें और अपने चैट पर पंचदूत की सभी ताज़ा खबरें पाएं।

तेल आयात में मामूली गिरावट:
कमोडिटी ट्रैकर Kepler के अनुसार, सितंबर 2025 में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल का 34% रूस से खरीदा। हालांकि, 2025 के पहले आठ महीनों में कुल आयात में 10% की कमी आई है। इसके बावजूद, सितंबर में भारत ने औसतन 4.5 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल मंगाया, अगस्त की तुलना में करीब 70,000 बैरल अधिक। सरकारी रिफाइनरियों ने जून से सितंबर के बीच रूसी तेल की खरीद में 45% की कटौती जरूर की, लेकिन कुल आयात स्तर लगभग स्थिर रहा।

देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें। आप हमें फेसबुकट्विटरइंस्ट्राग्राम और यूट्यूब चैनल पर फॉलो कर सकते हैं।